जागरण संवाददाता, भागलपुर। शहरी क्षेत्र में घर हो या प्रतिष्ठान, टैक्स जमा करने में अब तिकड़म नहीं चलेगा। हैदराबाद की एजेंसी ने गृहकर का आंकलन कर रही है। वहीं दूसरी ओर लोगों को होल्डिंग टैक्स को लेकर लोगों को स्वयं स्वकर गणना प्रपत्र भरना है। इसके बाद तकसीलदार से सत्यापन कराने की व्यवस्था होगी। ताकि कर निर्धारण में सर्किल रेट तक किया जा सके। ऐसे में हकीकत को छिपाकर कम टैक्स देने वालों की जेब पर भार बढऩा तय है। नए टैक्स में चार से पांच गुना तक अधिक धनराशि देनी पड़ सकती है।

दरअसल, टैक्स में पारदर्शिता लोन को स्वकर गणना प्रपत्र की योजना वर्ष 2014 में लाया गया था। वर्तमान में नगर निगम 76 हजार घरों से टैक्स लेता है। लेकिन, छह वर्ष में निगम अब तक 30 हजार लोगों से प्रपत्र भरवा पाया है। इससे गृहकर में हेराफेरी की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। जिसका प्रभाव निगम के आंतरिक संसाधन पर भी पड़ा है। नगर निगम में जो गृह स्वामी दो दशक पहले दो मंजिल का किराया दे रहा था, वो अब भी पुराने टैक्स स्लैब पर भुगतान कर रहा है। जबकि दो दशकों में कई लोग देा से तीन मंजिला भवन व कमरे का निर्माण कर रखा है। वो दो मंजिल का टैक्स दे रहे है। लेकिन अब मकान और दुकानों का सर्वे शुरू होगा। टैक्स देने के लिए निगम की ओर से स्वकर प्रपत्र बांटा जाएगा। भवन स्वामी भरकर निगम कार्यालय में जमा होगा।

घर बैठे टैक्स जमा करने की सुविधा

स्वकर गणना प्रपत्र के आवेदनों की जांच केे बाद इसको नगर निगम के ई-म्यूनिसिपल एप पर अपलेाड करना था। इससे गृह स्वामी के मोबाइल पर यूनिट आईडी नंबर उपलब्ध कराया जाना था। ताकि उक्त आईडी पर गुह स्वामी अपने होल्डिंग टैक्स को ऑनलाइन माध्यम से जमा कर पाते। लेकिन, इस महत्वाकांक्षी योजना पर ग्रहण लग गया।

शहर में होल्डिंग टैक्स का आंकलन करने के लिए एजेंसी सर्वे कर रही है। एजेंसी का रिपोर्ट मिलने पर नए सिरे से कर निर्धारण होगा।

- प्रफुल्ल चंद्र यादव, प्रभारी नगर आयुक्त  

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