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नवरात्र : ढाक की थाप से गूंजा भागलपुर! कालीबाड़ी व दुर्गाबाड़ी में खुले मां के पट, शनिवार को होगा 'केला बहू' का प्रवेश

Published: Fri, 16 Oct 2026 10:02 AM (GMT+05:30)

Durga Puja 2026: भागलपुर में शंखनाद और ढाक की थाप के साथ मां दुर्गा के आगमन का उल्लास चरम पर ...और पढ़ें

Durga Puja 2026: भागलपुर के कालीबाड़ी और दुर्गाबाड़ी में बांग्ला रीति-रिवाज से खुले मां के पट

Durga Puja 2026: भागलपुर के कालीबाड़ी और दुर्गाबाड़ी में बांग्ला रीति-रिवाज से खुले मां के पट

HighLights

  1. कालीबाड़ी और दुर्गाबाड़ी में मां दुर्गा के पट खुले।

  2. शनिवार को 'केला बहू' का प्रवेश और सप्तमी पूजा होगी।

  3. 17 से 20 अक्टूबर तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Durga Puja 2026: शंखनाद, घंटियों की गूंज और ढाक की पारंपरिक थाप के बीच रेशमी नगरी भागलपुर में मां दुर्गा के आगमन का उल्लास चरम पर पहुंच गया है। शहर में देवी के स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। गुरुवार शाम मानिक सरकार घाट रोड स्थित ऐतिहासिक कालीबाड़ी और मशाकचक स्थित दुर्गाबाड़ी में बांग्ला विधि-विधान से मां का बोधन कर प्रतिमा स्थापित की गई और पट खोल दिए गए।

मां के अलौकिक और भव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इसके साथ ही रिफ्यूजी कॉलोनी बरारी समेत कई स्थानों पर भी प्रतिमा स्थापना के साथ पूजा-अर्चना शुरू हो गई है, जबकि शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में सप्तमी तिथि (शनिवार) को मां के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।

कालीबाड़ी में बोधन के बाद आराधना शुरू

मानिक सरकार घाट रोड स्थित कालीबाड़ी में गुरुवार शाम आठ बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा वेदी पर प्रतिष्ठित की गई। कालीबाड़ी दुर्गापूजा समिति के महासचिव बिलास कुमार बागची ने बताया कि संध्या वेला में देवी का बोधन कर मां का आह्वान किया गया। महाआरती में बंगाली समाज सहित भारी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

प्रमुख तिथियां व अनुष्ठान

  • शुक्रवार (षष्ठी तिथि): मां कात्यायनी की आराधना; षष्ठी पूजा के तहत देवी का आमंत्रण और अधिवास अनुष्ठान।

  • शनिवार (सप्तमी तिथि, 17 अक्टूबर): नवपत्रिका प्रवेश ('केला बहू' की स्थापना); शहर के प्रमुख सार्वजनिक पूजा पंडालों के पट खुलेंगे।

  • कालीबाड़ी में विशेष भोग: सप्तमी को 5 प्रकार की सब्जी, भुजिया, खीर व चटनी; अष्टमी को पुलाव व विविध व्यंजन; नवमी को पारंपरिक खिचड़ी भोग।

  • दुर्गाबाड़ी में सांस्कृतिक उत्सव: 17 से 20 अक्टूबर तक आयोजन; शनिवार को फैंसी ड्रेस व डांडिया।

शनिवार को 'केला बहू' का प्रवेश

उन्होंने बताया कि शुक्रवार को षष्ठी पूजा के तहत आमंत्रण और अधिवास का विशेष अनुष्ठान संपन्न होगा। वहीं, शनिवार को सप्तमी तिथि पर नवपत्रिका प्रवेश कराया जाएगा। बंगाली परंपरा के अनुसार, केले के पौधे सहित नौ औषधीय वनस्पतियों से तैयार नवपत्रिका को गंगा स्नान कराकर लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी पहनाई जाती है और सिंदूर अर्पित कर भगवान गणेश के समीप स्थापित किया जाता है। लोकपरंपरा में इसे 'केला बहू' कहा जाता है और गणेश जी की पत्नी के स्वरूप में इनकी विशेष पूजा होती है।

दुर्गाबाड़ी में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी

उधर, मशाकचक स्थित दुर्गाबाड़ी में गुरुवार शाम सात बजे मां दुर्गा की प्रतिमा वेदी पर विराजमान की गई। आर्य धर्म प्रचारिणी सभा हरिसभा द्वारा आयोजित इस पूजनोत्सव में पुरोहित पंडित गोपी चटर्जी ने बांग्ला विधि-विधान से बोधन और आमंत्रण अनुष्ठान संपन्न कराया।

शनिवार को डांडिया

पूजा समिति के सचिव सुजय सर्वाधिकारी ने बताया कि मंदिर में 17 से 20 अक्टूबर तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी। शनिवार को बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता और डांडिया उत्सव का आयोजन किया जाएगा। आयोजन की सफलता को लेकर समिति के अध्यक्ष डॉ. शांतनु घोष, संयुक्त सचिव निरूपम कांतिपाल सहित अन्य सदस्य व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

आज मां कात्यायनी की पूजा

शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना के बाद शुक्रवार को शक्ति स्वरूपा मां कात्यायनी की विधिवत आराधना की जाएगी। धर्मशास्त्रों के अनुसार, मां कात्यायनी की भक्ति से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सहज प्राप्ति होती है।

कालीबाड़ी में लगेगा विशेष भोग

कालीबाड़ी में 18 से 20 अक्टूबर तक मां को अर्पित किए जाने वाले विशेष महाप्रसाद की रूपरेखा भी तय कर ली गई है। सप्तमी के दिन मां को पांच प्रकार की सब्जी, भुजिया, खीर और चटनी का भोग लगेगा। महाअष्टमी को पुलाव व विविध पकवान और महानवमी पर पारंपरिक खिचड़ी भोग अर्पित किया जाएगा।

सप्तमी पर इन प्रमुख पंडालों में खुलेंगे मां के पट

शनिवार, 17 अक्टूबर को सप्तमी तिथि के पावन अवसर पर मिरजानहाट क्लबगंज दुर्गा मंदिर, मोहद्दीनगर दुर्गास्थान, मुंदीचक गढ़ैया, आदमपुर दुर्गास्थान और हड़ियापट्टी स्थित गुरु छितनु सिंह अखाड़ा सहित शहर के तमाम प्रमुख पूजा स्थलों पर प्रतिमा स्थापित कर पट खोल दिए जाएंगे।

वहीं, रेलवे कॉलोनी स्थित दुर्गा मंदिर और लहेरी टोला के प्राचीन दुर्गा मंदिर में शुक्रवार को ही प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी है। शनिवार से शहरभर में भक्ति, रोशनी और मेलों की रौनक अपने पूरे शबाब पर होगी।