नाम 'मॉडल' काम 'सुस्त'.... भागलपुर में 53% छात्रों का नहीं हुआ फेस रिकॉग्निशन, कैसे पकड़ आएगी हाजिरी की चोरी
भागलपुर के मॉडल स्कूलों में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) के तहत छात्रों के पंजीकरण में भारी सुस्ती देखी जा रही है, जिससे सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
भागलपुर के मॉडल स्कूलों में FRS पंजीकरण धीमा।
18,631 छात्रों में से 9,786 का पंजीकरण लंबित।
तकनीकी दिक्कतें और लापरवाही मुख्य कारण बताए गए।
अभिषेक प्रकाश, भागलपुर। कहने को तो ये मॉडल स्कूल हैं। सबकुछ मानक, मिसाल और आदर्श। लेकिन, सरकारी सिस्टम की सुस्ती ने इनकी भी हालत पतली कर दी है। भागलपुर के 21 मॉडल स्कूलों में कैमरे को अपनी पहचान बताने में यहां के बच्चे खासे परहेज कर रहे।
जिम्मेवारों की काहिली ऐसी कि मिसाल बने जिला स्कूल में पढ़ने वाले 1106 छात्रों में सिर्फ 67 का रजिस्ट्रेशन ही फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) में दर्ज हुआ है, जबकि जिलेभर के कुल 2021 स्कूलों में जनवरी से शुरू चेहरा पहचान प्रणाली में 69% छात्रों का निबंधन हो गया है।
नगर निगम क्षेत्र के 5 समेत सभी 16 प्रखंड के आदर्श विद्यालयों में अब भी 53% छात्रों का फेस रिकॉग्निशन सिस्टम में पंजीकरण होना बाकी है।
तकनीकी दिक्कत बस बहाना, लापरवाही है असली वजह
एफआरएस में छात्रों का पंजीकरण न होने के पीछे लापरवाही प्रमुख कारण है। हालांकि, कई हेडमास्टर तकनीकी दिक्कत का रोना रो रहे। बताया गया कि इसके लिए सरकारी विद्यालयों को 4304 टैब उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में नेटवर्क नहीं आने का बहाना बनाकर ढिलाई की जा रही। कहीं टैब आन नहीं कर पा रहे, तो कहीं सॉफ्टवेयर में परेशानी है।
कई स्कूलों में प्रधानाचार्य भी दिलचस्पी नहीं ले रहे। वहीं जिला मुख्यालय से प्रभावी निगरानी नहीं होने से भी एफआरएस की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने भी मॉडल स्कूलों में एफआरएस पंजीकरण में तेजी लाने का निर्देश दिया था। बावजूद, मॉडल स्कूलों में पढ़ रहे 18,631 बच्चों में 9,786 बच्चों का अब भी पंजीकरण नहीं हुआ है।
सरकार की बड़ी सोच, डिजिटल पहचान से लाभ ही लाभ
सरकार ने माध्यमिक/उच्च शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए राज्य के सभी ब्लाक में मॉडल स्कूल खोले हैं। इनमें जिले के हिस्से कुल 21 प्रतिमान विद्यालय आए। जहां डिजिटल पहचान के जरिये शिक्षण व्यवस्था को अनुकरणीय बनाया जा रहा।
सोच यह है कि चेहरे की पहचान आधारित उपस्थिति से छात्रों की फर्जी या कागजी हाजिरी पर रोक लगेगी। छात्रों के समय पर स्कूल पहुंचने से शैक्षणिक माहौल बेहतर होगा।
वास्तविक उपस्थिति दर्ज होने से एमडीएम, पोशाक, साइकिल और छात्रवृत्ति का लाभ सही बच्चों तक पहुंचेगा। छात्रों-शिक्षकों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
मॉडल स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर एफआरएस का निर्देश दिया गया है। ऐसे सभी स्कूलों की सूची बना रहे, जहां रजिस्ट्रेशन लंबित है। जहां तकनीकी परेशानी है, उसे दूर कराया जा रहा, ताकि शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन हो सके। -चंदन कुमार, डीईओ
