साल भर से सिर्फ केला खाकर ऊबे स्कूली बच्चे! शिक्षक की शिकायत पर जागा शिक्षा विभाग, MDM की थाली में बदलेंगे फल
Bhagalpur MDM Seasonal Fruits Order: भागलपुर के सरकारी स्कूलों में बच्चों को साल भर से सिर्फ केला मिलने की शिकायत ...और पढ़ें

Bhagalpur MDM Seasonal Fruits Order: सहयोग पोर्टल की शिकायत लाई रंग! भागलपुर के 1756 स्कूलों में अब बदल-बदलकर मिलेंगे फल।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur MDM Seasonal Fruits Order: भागलपुर जिले के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों की बाल जिह्वा पिछले एक साल से मध्याह्न भोजन (MDM) में हर शुक्रवार केवल केला खाते-खाते ऊब चुकी थी। बच्चों की इस मूक परेशानी को आखिरकार जिले के एक सजग शिक्षक ने आवाज दी और शिक्षा विभाग के 'सहयोग पोर्टल' पर इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत का असर यह हुआ कि जिला शिक्षा विभाग का एमडीएम प्रभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने बच्चों के मेन्यू में विविधता लाने की कवायद शुरू करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब थाली में सिर्फ केला नहीं, बल्कि सेब और मौसंबी जैसे पोषक मौसमी फल भी परोसे जाएंगे।
एमडीएम के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) महेश प्रसाद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्याह्न भोजन आपूर्ति से जुड़े सभी गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को कड़ा निर्देश पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि शुक्रवार को दिए जाने वाले अतिरिक्त पोषण में एकरूपता खत्म की जाए और तय बजट सीमा के भीतर बच्चों को विभिन्न प्रकार के ताजे मौसमी फल उपलब्ध कराए जाएं।
सहयोग पोर्टल पर शिक्षक ने उठाई थी आवाज
जिले के एक शिक्षक ने गत 24 अक्टूबर को 'सहयोग पोर्टल' पर शिकायत दर्ज कराते हुए विभाग का ध्यान इस ओर खींचा था कि महीनों से विद्यालयों में फल के नाम पर सिर्फ केला देकर रस्म अदायगी की जा रही है। जिले के 1756 प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में रोजाना मध्याह्न भोजन योजना संचालित होती है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना 65 से 70 प्रतिशत बच्चे स्कूलों में भोजन ग्रहण करते हैं। शहर और आसपास के इलाकों में जहां केंद्रीकृत रसोई (एनजीओ) के जरिए तैयार भोजन पहुंचता है, वहीं ग्रामीण इलाकों में वेंडर और विद्यालय प्रबंधन समिति के माध्यम से सामग्री जुटाई जाती है।
साल भर से केले का ही स्वाद, संतरा देकर बंद किया
शिक्षकों और छात्र-छात्राओं का कहना है कि जिले के लगभग सभी प्रखंडों में करीब एक साल से केवल केला ही दिया जा रहा है। पिछले साल ठंड के मौसम में कुछ सप्ताह तक संतरा दिया गया था, लेकिन आपूर्ति में झंझट बताकर उसे भी बंद कर दिया गया और दोबारा केले का ही वितरण शुरू हो गया।
लगातार एक ही फल मिलने से कई बार बच्चे फल लेने में रुचि तक नहीं दिखाते थे। अब डीपीओ के निर्देश के बाद उम्मीद जगी है कि बच्चों को सेब, मौसंबी और नाशपाती जैसे फलों का स्वाद भी नियमित रूप से चखने को मिलेगा।
डीपीएम और बीआरपी करेंगे स्थलीय जांच, देनी होगी रिपोर्ट
आदेश केवल कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए डीपीओ ने निगरानी तंत्र को भी सक्रिय कर दिया है। उन्होंने जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) और प्रखंड साधन सेवी (बीआरपी एमडीएम) को विद्यालयों और एनजीओ की केंद्रीकृत रसोई का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया है।
जांच अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों को निर्धारित मानक के अनुसार बदल-बदलकर फल दिए जा रहे हैं या नहीं। जांच टीम को औचक निरीक्षण के उपरांत अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिला कार्यालय को सौंपनी होगी, जिसके आधार पर कोताही बरतने वाली एजेंसियों या संबंधित प्रभारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
