चेहरे से रिसते खून व सूजी आंख ने खड़े किए सवाल; JLNMCH में भागलपुर जेल के कैदी नटवर की मौत, परिजन ने जांच की मांग की
Bhagalpur Special Central Jail Convict Death:भागलपुर की विशेष केंद्रीय कारा के सजायाफ्ता बंदी धीरज कुमार पांडेय 'नटवर' की इलाज के ...और पढ़ें

Bhagalpur Special Central Jail Convict Death: भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा के सजायाफ्ता बंदी धीरज पांडेय की अस्पताल में मौत; आंख के नीचे मिले जख्म के निशान, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप
HighLights
भागलपुर जेल के बंदी धीरज पांडेय की अस्पताल में मौत।
परिजनों ने आंख पर जख्म देख हत्या का आरोप लगाया।
जेल प्रशासन ने आरोपों को निराधार बताया, बीमारी से मौत।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Special Central Jail Convict Death: भागलपुर स्थित विशेष केंद्रीय कारा (कैंप जेल) में बंद एक सजायाफ्ता बंदी की शुक्रवार की सुबह जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज) के बंदी वार्ड में उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक बंदी की पहचान बांका जिले के अमरपुर प्रखंड अंतर्गत कल्याणपुर (पवई) निवासी धीरज कुमार पांडेय 'नटवर' के रूप में हुई है। हालांकि जेल में जाने से पूर्व धीरज भागलपुर के शिवपुर कॉलोनी में पत्नी व दोनों बेटियों के साथ रहते थे। मां, पिता सहित अन्य परिजन कभी-कभार भागलपुर आते थे।
बंदी की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल पहुंचे परिजनों ने जेल और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जमकर आक्रोश जताया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बंदी की सामान्य बीमारी से मौत नहीं हुई है, बल्कि उसकी हत्या की गई है। JLNMCH में कैदी के इलाज में भी लापरवाही बरतरने का आरोप लगाया है इस संबंध में परिजनों ने जिलाधिकारी को लिखित आवेदन देकर हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराने की गुहार लगाई है। अस्पताल के मौत होने के बाद परिजन आक्रोशित थे। काफी देर तक वहां हंगामा भी किया।
परिजन ने कहा- जेल में मारपीट हुई होगी
मृत बंदी के पिता शंभू शरण पांडेय ने बताया कि जब उन्होंने अस्पताल में अपने बेटे का शव देखा, तो उसकी आंख के नीचे गहरे जख्म के निशान मिले। आंख में सूजन था। कान, नाक से खून निकल रहा था। परिजनों ने कहा कि इन चोटों के निशानों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि उसके साथ जेल में मारपीट की गई या फिर उसे जानबूझकर मौत के मुंह में धकेला गया है। परिजनों के अनुसार, धीरज कोर्ट कंप्लेंट से जुड़े एक मामले में न्यायालय से सजायाफ्ता होने के बाद विशेष केंद्रीय कारा में सजा काट रहा था।
डीएम ने बीडीओ को किया प्रतिनियुक्त
घटना की गंभीरता और जेल प्रशासन से मिले पत्राचार के बाद जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने तुरंत प्रशासनिक जांच का आदेश जारी किया। डीएम ने सबौर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) नीतीश कुमार को दंडाधिकारी के रूप में अधिकृत करते हुए मृतक बंदी के शव का इनक्वेस्ट (पंचनामा) तैयार कराने का निर्देश दिया। इसके साथ ही पूरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिए गए।
बांका जिले के अमरपुर पवई निवासी सजायाफ्ता बंदी धीरज कुमार पांडेय की मायागंज अस्पताल के बंदी वार्ड में इलाज के दौरान मौत
शव पर आंख के नीचे जख्म के निशान देख भड़के परिजन, चेहरे से निकल रहा था खून
जेल के अधिककारी, पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही व हत्या का आरोप लगा डीएम को सौंपा आवेदन
जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय के निर्देश पर सबौर बीडीओ ने तैयार कराया पंचनामा
मेडिकल बोर्ड द्वारा वीडियोग्राफी में कराया गया पोस्टमार्टम
जेल अधीक्षक राजीव कुमार झा ने आरोपों को बेबुनियाद बताया; कहा- बंदी पूर्व से लीवर सिरोसिस व सांस की बीमारी से था गंभीर पीड़ित
वीडियोग्राफी में हुआ पोस्टमार्टम
प्रशासनिक देखरेख में तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया, जिसने शव का विधिवत पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया। वहीं, मामले में डीपीसी गंगा राम के फर्द बयान के आधार पर बरारी थाने में अस्वाभाविक मौत (यूडी केस) दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी या साक्ष्य सामने आते हैं, तो नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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लीवर सिरोसिस से पीड़ित था बंदी
धीरज की मौत के बाद परिजन काफी गुस्से में है। परिजन ने अस्पताल प्रशासन, जेल अधिकारी व पुलिस पर कई आरोप लगाए। परिजन ने अस्पताल व पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जमकर हंगामा किया। उधर, परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही और हत्या के आरोपों को जेल प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है। विशेष केंद्रीय कारा के अधीक्षक राजीव कुमार झा ने बताया कि बंदी धीरज कुमार पांडेय लंबे समय से लीवर सिरोसिस और सांस लेने में गंभीर तकलीफ जैसी जानलेवा बीमारियों से ग्रसित था।
जेल अधीक्षक ने कहा- उपचार चल रहा था
जेल अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में उसका नियमित उपचार चल रहा था। शुक्रवार तड़के उसकी तबीयत अचानक अत्यधिक बिगड़ने लगी, जिसके बाद जीवन रक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे तत्काल जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के कैदी वार्ड में शिफ्ट किया गया था, जहां सुबह करीब साढ़े सात बजे उपचार के क्रम में उसने दम तोड़ दिया। जेल अधीक्षक ने कहा कि परिजनों द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोप पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन हैं।
