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भागलपुर में बाढ़ का स्थायी इलाज तलाशेगी 'मैथमेटिकल मॉडलिंग', दीपावली के बाद शुरू होगा गंगा की धारा का सर्वे

Published: Mon, 07 Sep 2026 05:09 PM (IST)

गंगा की बदलती धारा और बाढ़ की चुनौती से निपटने के लिए भागलपुर में जल संसाधन विभाग मैथमेटिकल मॉडलिंग का सहारा लेगा।

भागलपुर में बाढ़ का स्थायी इलाज तलाशेगी 'मैथमेटिकल मॉडलिंग' (AI Generated Image)

भागलपुर में बाढ़ का स्थायी इलाज तलाशेगी 'मैथमेटिकल मॉडलिंग' (AI Generated Image)

HighLights

  1. गंगा की बदलती धारा से बाढ़ की चुनौती जटिल हुई।

  2. मैथमेटिकल मॉडलिंग से नदी प्रवाह का विस्तृत अध्ययन होगा।

  3. भागलपुर में बाढ़ के स्थायी समाधान की कार्ययोजना बनेगी।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। गंगा की बदलती धारा ने बाढ़ की चुनौती को और जटिल कर दिया है। गंगा की मुख्य धारा की चौड़ाई करीब 1.25 से 1.50 किलोमीटर तक है, जबकि राघोपुर में जहां जमींदारी बांध था, वहां नदी की चौड़ाई घटकर करीब 800 मीटर रह गई थी।

नदी के इस संकरे हिस्से में जलस्तर बढ़ने के साथ पानी का दबाव तेजी से बढ़ा, जिसका असर तटबंध पर पड़ा। तटबंध के क्षतिग्रस्त होने के पीछे नदी की धारा में आए बदलाव और पानी के दबाव को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है।

अब जल संसाधन विभाग गंगा की धारा को व्यवस्थित करने के लिए मैथमेटिकल मॉडलिंग का सहारा लेगा। इसके तहत नारायणपुर प्रखंड से लेकर गोपालपुर तक एवं भागलपुर शहरी क्षेत्र की ओर पुरानी गंगा की धारा का विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा।

इसमें पिछले करीब चार से पांच दशकों के नदी प्रवाह, बाढ़, जलस्तर और धारा में हुए बदलाव के आंकड़ों का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर यह समझने का प्रयास होगा कि गंगा की धारा किस दिशा में और किस रूप में बदल रही है तथा भविष्य में इसके क्या प्रभाव हो सकते हैं।

दीपावली के बाद सर्वे

दीपावली के बाद गंगा की धारा के विस्तृत सर्वे का काम शुरू करने की तैयारी है। सर्वे के बाद नदी के पुराने प्रवाह, वर्तमान धारा, कटाव वाले क्षेत्रों, पानी के बंटवारे और बाढ़ के प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसके निष्कर्षों के आधार पर सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

रिपोर्ट के आधार पर ऐसी कार्ययोजना तैयार करने का लक्ष्य है, जिससे भागलपुर में गंगा के बदलते प्रवाह और बाढ़ के प्रभाव का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान तलाशा जा सके।

कहां से गुजर रही धारा, कितना पानी किस ओर, होगा अध्ययन

मैथमेटिकल मॉडलिंग सर्वे के दौरान नदी की वर्तमान और पुरानी धाराओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि नदी की मुख्य धारा किन क्षेत्रों से होकर गुजरती रही है, कहां पुरानी या टूटी धाराएं मौजूद हैं, किन स्थानों पर कटाव हो रहा है और अलग-अलग धाराओं में पानी का कितना प्रतिशत बंटवारा हो रहा है।

रिवर हाइड्रोलॉजी के आंकड़ों के आधार पर नदी के व्यवहार को समझने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए प्लानर का चयन भी किया जाएगा। विभाग की ओर से प्लानर चयन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।

सर्वे और मॉडलिंग के निष्कर्ष के आधार पर यह तय किया जाएगा कि गंगा की धारा को किस दिशा में व्यवस्थित किया जाए और किस धारा को मुख्य प्रवाह में शामिल करना बेहतर होगा।

शहर और दियारा, दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनेगी योजना

जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख (बाढ़) वरुण कुमार ने बताया कि गंगा की धारा को व्यवस्थित करने की योजना बनाते समय केवल शहर को ही नहीं, बल्कि दियारा क्षेत्र की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि सर्वे के बाद ही स्पष्ट रूप से तय हो सकेगा कि नदी की धारा को किस दिशा में रखा जाए और किस तरह की दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार की जाए।

उन्होंने बताया कि सोन, गंडक, बूढ़ी गंडक सहित नेपाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से आने वाला पानी भी गंगा में प्रवाह होता है। कई नदियों का पानी मिलने से भागलपुर मैदानी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां पानी के फैलाव की स्थिति भी अधिक बनती है।

मैथमेटिकल मॉडलिंग से क्या पता चलेगा?

  • गंगा की धारा पिछले 40-50 वर्षों में कितनी बदली
  • किस स्थान पर नदी की चौड़ाई कम या अधिक हुई
  • बाढ़ के दौरान पानी किस दिशा में फैलता है
  • किस धारा में कितना पानी प्रवाहित हो रहा है
  • किन क्षेत्रों में कटाव का खतरा अधिक है
  • भविष्य में नदी की संभावित धारा किस दिशा में जा सकती है
  • तटबंध और बाढ़ सुरक्षा के लिए किस तरह की दीर्घकालीन योजना जरूरी होगी

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