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भागलपुर में पावरलूम की खटखट पर लगा बाढ़ का ब्रेक, बुनकरों पर ₹20000000 की चोट

Published: Fri, 11 Sep 2026 02:51 PM (IST)

भागलपुर के नाथनगर और चंपानगर में बाढ़ के कारण 800 पावरलूम बंद हो गए हैं, जिससे बुनकरों की आजीविका पर गहरा संकट आ गया है।

भागलपुर में बाढ़ से बुनकरों पर दो करोड़ की मार, पावरलूम उद्योग ठप (AI Generated Image)

भागलपुर में बाढ़ से बुनकरों पर दो करोड़ की मार, पावरलूम उद्योग ठप (AI Generated Image)

HighLights

  1. बाढ़ से नाथनगर-चंपानगर के 800 पावरलूम बंद हुए।

  2. धागे-कपड़े का 50 लाख, कुल 2 करोड़ से अधिक नुकसान।

  3. बुनकरों को महाजनों का कर्ज चुकाने की चिंता बढ़ी।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर के प्रमुख बुनकर इलाके नाथनगर और चंपानगर में बाढ़ ने बुनकरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया है। घरों से लेकर पावरलूम कारखानों तक में पानी घुसने से करीब 800 पावरलूम बंद हो गए हैं।

चंपानगर के वार्ड संख्या एक से चार तक अहमदनगर, मदनीनगर, बाबूटोला, बोरिंग वाड़ी, हकीम शाह लेन और घाट किनारा मस्जिद लेन की गलियों में चार से पांच फीट तक पानी है।

300 से अधिक घर बाढ़ की चपेट में हैं। घरों के अंदर भी तीन से चार फीट पानी जमा है। जिन इलाकों में दिन-रात पावरलूम की खटखट सुनाई देती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है।

धागा और तैयार कपड़ा भी बर्बाद

बुनकरों के अनुसार एक पावरलूम पर करीब 30 हजार रुपये का धागा लगा रहता है। बड़ी मात्रा में धागा और तैयार सिल्क कपड़ा पानी में खराब हो गया है।

करीब 50 लाख रुपये के धागे के नुकसान का अनुमान है। मशीनों के मोटर और अन्य उपकरण भी पानी में डूबने से खराब होने की आशंका है।

महाजनों का कर्ज चुकाने की चिंता

अधिकांश बुनकर महाजनों से धागा लेकर कपड़ा तैयार करते हैं। तैयार माल के आधार पर उन्हें मजदूरी मिलती है। अब धागा और कपड़ा बर्बाद होने से उनके सामने महाजनों का कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ ने उनकी जमा पूंजी के साथ काम का जरिया भी छीन लिया है।

मेंटेनेंस में लगेंगे 80 लाख

पार्षद गुलाम हैदर ने बताया कि पानी उतरने के बाद भी परेशानी कम नहीं होगी। एक पावरलूम के मेंटेनेंस में करीब 10 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। 800 पावरलूम के हिसाब से यह राशि करीब 80 लाख रुपये होगी। आर्थिक संकट से जूझ रहे बुनकरों के लिए इतनी राशि जुटाना मुश्किल है।

त्योहारों के सीजन में कारोबार ठप

दुर्गापूजा, दीपावली और छठ से पहले सिल्क की मांग बढ़ने की उम्मीद में बुनकरों और कारोबारियों ने कपड़ा तैयार किया था। बाढ़ से उत्पादन और आपूर्ति दोनों ठप हैं। संपर्क मार्गों पर पानी भरने से तैयार माल बाहर भेजना मुश्किल हो गया है। कई आर्डर रद होने की स्थिति में हैं।

पार्षद गुलाम हैदर, नेजाहत अंसारी और अलीम अंसारी ने सरकार से बुनकरों के नुकसान का सर्वे कराकर क्षतिपूर्ति देने की मांग की है। उन्होंने उद्योग विभाग से तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की।

बुनकरों के अनुसार धागा, तैयार कपड़ा, मशीनों और उपकरणों के नुकसान तथा मेंटेनेंस का खर्च जोड़ने पर चंपानगर क्षेत्र में नुकसान दो करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान है।

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