विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आंगन से लौटी गंगा, पर खेतों में भरा पानी! भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बरकरार; 15-20 दिन बाद घर वापसी

Published: Wed, 16 Sep 2026 10:38 AM (IST)

Bhagalpur Flood Water Receding Update: भागलपुर में गंगा और कोसी नदियों का जलस्तर घटने से बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर ...और पढ़ें

Bhagalpur Flood Water Receding Update: भागलपुर में गंगा-कोसी के जलस्तर में गिरावट, मगर जलजमाव ने बढ़ाई आफत; दियारा और निचले इलाकों में कब सुधरेंगे हालात

Bhagalpur Flood Water Receding Update: भागलपुर में गंगा-कोसी के जलस्तर में गिरावट, मगर जलजमाव ने बढ़ाई आफत; दियारा और निचले इलाकों में कब सुधरेंगे हालात

HighLights

  1. गंगा-कोसी का जलस्तर घटा, बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा।

  2. जलजमाव और दलदल से विस्थापितों की घर वापसी में देरी।

  3. खेतों में पानी भरा होने से खरीफ फसलें पूरी तरह नष्ट।

जागरण टीम, भागलपुर। Bhagalpur Flood Water Receding Update:  जिले में गंगा और कोसी नदियों के उफान पर आखिरकार विराम लग गया है और दोनों प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। आवासीय बस्तियों, गांवों और आंगन से बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों ने कुछ हद तक राहत की सांस ली है। हालांकि, नदियों के लौटने के बावजूद बाढ़ विस्थापितों और दियारा क्षेत्र के निवासियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

पानी घटने के बाद अब सबसे बड़ी मुसीबत जलजमाव (Waterlogging) और दलदल बनकर सामने आई है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण खेत-खलिहानों और संपर्क मार्गों पर अब भी घुटनों तक मटमैला पानी ठहरा हुआ है, जिसके कारण विस्थापित परिवारों की घर वापसी अधर में लटकी है। प्रखंडवार स्थिति पर नजर डालें तो अलग-अलग इलाकों में चुनौतियां अब भी बरकरार हैं:

नाथनगर: सड़कों से पानी हटा

नाथनगर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में मुख्य सड़कों के ऊपर से गंगा का पानी उतर चुका है, जिससे वाहनों व पैदल यात्रियों का आवागमन धीरे-धीरे बहाल हो रहा है। इसके विपरीत, दियारा इलाके की बस्तियों और झोपड़ियों के भीतर अब भी जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, दियारा के घरों से पानी और कीचड़ सूखने में कम से कम 15 से 20 दिन का वक्त लगेगा। ऐसे में सुरक्षित ठिकानों पर शरण लिए परिवारों को अपने आशियाने में लौटने के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

रोज 3 से 5 सेमी घट रही नदी, फिर भी बांध पर जिंदगी

नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र में गंगा और कोसी दोनों ही नदियों के जलस्तर में रोजाना 3 से 5 सेंटीमीटर की क्रमिक कमी देखी जा रही है। नदी का फैलाव घटने से बाढ़ के खतरे में कमी आई है, लेकिन इस्माईलपुर, गोपालपुर और रंगरा प्रखंड के सैकड़ों विस्थापित परिवार अब भी बांधों और ऊंची सड़कों पर ही शरण लिए हुए हैं। निचले टोले-मोहल्लों में अब भी पानी भरा होने के कारण लोग अपने मवेशियों के साथ खुले आसमान या तंबुओं के नीचे दिन काटने को विवश हैं।

  • भागलपुर जिले में गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में निरंतर गिरावट; प्रतिदिन 3 से 5 सेंटीमीटर तक घट रहा पानी

  • गांव और बस्तियों से बाढ़ का पानी निकलने से आंशिक राहत, लेकिन निचले इलाकों व दियारा क्षेत्र में भीषण जलजमाव बरकरार

  • नवगछिया के इस्माईलपुर, गोपालपुर व रंगरा के विस्थापित अब भी सड़क और तटबंधों पर पॉलीथिन तानकर रहने को मजबूर

  • नाथनगर, अजगैवीनाथ धाम और कहलगांव के कई गांवों में निकासी न होने से खेत-खलिहान डूबे; किसानों की फसलें बर्बाद

अजगैवीनाथ धाम: गनगनियां, तिलकपुर और महेशी में संपर्क मार्ग बंद

अजगैवीनाथ धाम (सुल्तानगंज) प्रखंड क्षेत्र में गंगा के जलस्तर में कमी जरूर आई है, लेकिन गनगनियां, तिलकपुर और महेशी सहित अन्य पंचायतों के निचले रिहायशी इलाकों में स्थिति अभी सामान्य नहीं हो सकी है। कई मोहल्लों तक पहुंचने वाले संपर्क पथ जलमग्न हैं, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जान जोखिम में डालकर गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। प्रभावित परिवारों के समक्ष शुद्ध पेयजल, राशन, बच्चों का दूध और दैनिक आवश्यकताओं का घोर संकट बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पूरे इलाके से पानी नहीं निकल जाता, तब तक उनकी वास्तविक परेशानियां खत्म नहीं होंगी।

कहलगांव: निकासी न होने से खेत डूबे, फसलें बर्बाद

कहलगांव प्रखंड के अधिकांश गांवों से बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन तोफिल और अनठावन गांव अब भी जलभराव की चपेट में हैं। भौगोलिक बनावट और प्राकृतिक जलनिकासी के रास्तों पर अवरोध होने के कारण इन गांवों में पानी स्थिर हो गया है। सबसे ज्यादा मार किसानों पर पड़ी है; खेतों में लंबे समय से जमा पानी के कारण खरीफ की फसलें पूरी तरह सड़कर नष्ट हो चुकी हैं। किसान अब इस चिंता में हैं कि यदि खेतों से पानी जल्द नहीं निकला, तो अगली रबी फसल की बुआई पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।