आपने गंगा को दिया नाले का गंदा पानी, कचरा व प्लास्टिक, गंगा ने आपको वही लौटा दिया, इसे कहते हैं तेरा तुझको अर्पण
Bhagalpur Flood Receding Plastic Waste Ground Report: भागलपुर में बाढ़ का पानी उतरने के बाद गलियां कचरे और सड़ांध से ...और पढ़ें

Bhagalpur Flood Receding Plastic Waste Ground Report: गंगा ने कुछ नहीं भुलाया, हमारा कचरा हमें लौटाया; भागलपुर में बाढ़ उतरते ही गलियों में पसरा प्लास्टिक और नरक जैसी सड़ांध
HighLights
गलियों में सड़े कचरे, गाद और प्लास्टिक का अंबार।
हवा में तीखी सड़ांध, संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा।
गंगा में फेंका कचरा वापस लौटा, नगर निगम के सामने चुनौती।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Flood Receding Plastic Waste Ground Report: आदमपुर की बैंक कालोनी...। करीब एक पखवाड़े तक कमर से ऊपर पानी में डूबे रहे इस संभ्रांत मोहल्ले की मुख्य सड़कों से पानी अब धीरे-धीरे भले उतर गया हो, लेकिन अंदरूनी गलियों की तस्वीर रूह कंपा देने वाली है। मानिक सरकार की तरफ जाने वाली चौथी गली में अभी भी मटमैला पानी अटका है, तो तीसरी गली से पानी उतरने के बाद जो मंजर उभरा है, वह इंसानी लापरवाही का वीभत्स आईना है।
यहां एक मकान के पीछे के रास्ते से लोहे की सीढ़ी लगाकर परिवार के लोग नीचे उतर रहे हैं। पूरी गली सड़े हुए कचरे, गाद और प्लास्टिक की बोतलों से अटी पड़ी है। हवा में पसरी तीखी सड़ांध के कारण राहगीर अनायास ही नाक पर रुमाल रख लेते हैं। सीढ़ी से नीचे उतर रहे स्थानीय निवासी मितेश कुमार झा गहरा तंज कसते हैं— 'आप भी कुछ देर रुकिए, आदत पड़ जाएगी।'
बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही आदमपुर बैंक कालोनी, खंजरपुर, साहेबगंज और चंपानगर में कीचड़, प्लास्टिक और कचरे का लगा अंबार
शहर ने नालों के जरिए जो प्लास्टिक बोतलें और गंदगी गंगा में बहाई थी, उफनती लहरों ने वापसी में वही कचरा गलियों में उगल दिया
चंपा पुल से चंपानगर चौक तक 100 मीटर लंबा मुख्य नाला और हथिया नालियां प्लास्टिक से जाम; बदबू और मच्छरों से संक्रामक बीमारियों का खतरा
नगर निगम के सामने सफाई की अग्निपरीक्षा; प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग, चूना और एंटी लार्वा छिड़काव के निर्देश
इस एक मार्मिक व्यंग्य में बाढ़ के बाद भागलपुर की नारकीय त्रासदी का पूरा सच सिमट आया है। गंगा अब अपने पाट में लौट रही हैं, लेकिन पीछे छोड़ गई हैं वह सारा कचरा, जिसे कभी इसी शहर ने अपनी नागरिक जिम्मेदारियों को ताक पर रखकर नालों के रास्ते गंगा और चंपा नदी के हवाले कर दिया था। ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने शहर से पाई-पाई का हिसाब चुकता कर लिया हो— 'तेरा तुझको अर्पण।'
कुछ यही दिल दहला देने वाली स्थिति बूढ़ानाथ, खिरनीघाट, खंजरपुर महाराज घाट, साहेबगंज, चंपानगर मस्जिद लेन, मदनीनगर, बोरिंग बाड़ी और मोहनपुर के निचले इलाकों की है। चंपा पुल से लेकर चंपानगर चौक के बीच करीब 100 मीटर लंबा मुख्य नाला पॉलीथिन और प्लास्टिक की बोतलों से लबालब जाम है। शहर के मुहाने पर गंगा में गिरने वाली हथिया नालियों में पानी की जगह प्लास्टिक का तैरता हुआ द्वीप नजर आ रहा है।
'गंगा ने कुछ नहीं भुलाया- न हमारी आस्था, न हमारी लापरवाही'
चंपानगर घाट पर खड़े विनोद कुमार बेबसी से कहते हैं, "पानी की सतह पर तैरते इस कचरे को देखकर लगता है कि कोई बड़ी छन्नी लगाकर इसे निकाल लें, लेकिन यह किसी एक आम नागरिक के बूते का काम नहीं है।"
वहीं, बैंक कालोनी के बाशिंदे और जिला स्कूल के पूर्व प्राचार्य योगेश्वर झा की दार्शनिक बातें हर किसी को आत्ममंथन के लिए विवश कर देती हैं। वे कहते हैं— "नदी किनारे हम आस्था के दीप जलाते हैं, श्रद्धा से आरती उतारते हैं और गंगा को मां पुकारते हैं। लेकिन अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का तमाम कचरा, बोतलें और पॉलीथिन उसी पवित्र नदी के आंचल में उड़ेल देते हैं। आज जो कुछ गलियों में बिखरा पड़ा है, वह प्रत्यक्ष प्रमाण है कि गंगा ने कुछ नहीं भुलाया— न हमारी दिखावे की आस्था, न हमारी लापरवाही और न वह जहर, जो हमने उसकी निर्मल धारा में घोला था। आज मां ने हमारा ही कचरा हमें लौटा दिया है।"
संक्रामक बीमारियों की आहट, नगर निगम के सामने सफाई की अग्निपरीक्षा
पानी उतरने के बाद अब प्रभावित मोहल्लों में सड़ांध, गंदगी और मच्छरों का भयानक प्रकोप शुरू हो गया है। खाली पड़े प्लॉटों में भरा मटमैला पानी सड़ चुका है, जिससे डायरिया, डेंगू और त्वचा संबंधी संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से मंडराने लगा है। स्थानीय पार्षद गुलाम हैदर और अयाज अंसारी का कहना है कि नालों में ठोस प्लास्टिक जमा होने से अंदरूनी नालियों का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है, जिससे दर्जनभर वार्डों में जलजमाव और सड़ांध की विकट समस्या पैदा हो गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के स्वास्थ्य शाखा प्रभारी आदित्य जायसवाल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित सभी बस्तियों में युद्धस्तर पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों को फॉगिंग, एंटी लार्वा, चूना और ब्लीचिंग पाउडर के नियमित छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं। चंपानगर मुख्य नाले और हथिया नालों में फंसे भारी प्लास्टिक कचरे को
