बिहार : असली शिक्षक बकाये के लिए काटते रहे चक्कर, नकली शिक्षिका का दो महीने में बेड़ा पार; खाते में पहुंचे 6.74 लाख
Bhagalpur Education Department Salary Scam: भागलपुर शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के कथित वेतन घोटाले का खुलासा हुआ है, ...और पढ़ें

Bhagalpur Education Department Salary Scam : असली शिक्षक बकाये के लिए काटते रहे चक्कर
HighLights
फर्जी शिक्षिका तनुश्री को मिले 6.74 लाख रुपये।
53 दिनों में 13 किस्तों में हुए भुगतान।
बैकडेट नियुक्ति और जनधन खाते का उपयोग।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Education Department Salary Scam: जिला शिक्षा विभाग में सामने आए 98.12 लाख रुपये के बहुचर्चित कथित वेतन घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे भुगतान के आंकड़ों में मिलीभगत का हैरान करने वाला खेल उजागर हो रहा है। जहां एक ओर विभाग में वास्तविक शिक्षकों को अपने जायज बकाये और वेतन भुगतान के लिए महीनों कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
वहीं दूसरी ओर कथित फर्जी शिक्षिका तनुश्री के नाम पर तनुजा देवी के बैंक खाते में महज 53 दिनों के भीतर 13 किस्तों में 6,74,452 रुपये की भारी-भरकम राशि निर्गत कर दी गई। शिक्षा विभाग और ट्रेजरी के माध्यम से यह राशि 10 अप्रैल से 1 जून के बीच ताबड़तोड़ भेजी गई।
हैरत की बात यह है कि बिना किसी सत्यापन के एक ही दिन में कई बार वेतन भुगतान के बिल पास किए गए। 5 मई को एक ही दिन में चार बार, 8 मई को दो बार और 1 जून को दो बार राशि भेजी गई, जिससे विभागीय निगरानी और ट्रेजरी की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
5 मई को एक ही दिन में चार बार भुगतान
उपलब्ध भुगतान विवरण के अनुसार, संबंधित बैंक खाते में पहली किस्त 10 अप्रैल को 49,737 रुपये भेजी गई थी। इसके बाद 5 मई को नियम-कायदों को ताक पर रखकर एक ही दिन में चार अलग-अलग बिलों के जरिए कुल 2,00,861 रुपये ट्रांसफर किए गए।
53 दिनों में 13 किस्तों का भुगतान: एक नजर में
10 अप्रैल: ₹49737, 22 अप्रैल: ₹49737, 30 अप्रैल: ₹64000
05 मई (पहला भुगतान): ₹49737, 05 मई (दूसरा भुगतान): ₹49737
05 मई (तीसरा भुगतान): ₹51650, 05 मई (चौथा भुगतान): ₹49737
07 मई: ₹49675, 08 मई (पहला भुगतान): ₹50675
08 मई (दूसरा भुगतान): ₹50675, 11 मई: ₹50675
01 जून (पहला भुगतान): ₹50675, 01 जून (दूसरा भुगतान): ₹57742
कुल अंतरित राशि: ₹6,74,452 (छह लाख चौहत्तर हजार चार सौ बावन रुपये)
आंख मूंदकर पास हुए बिल
इसके बाद 8 मई को 50,675 रुपये की दो किस्तों में कुल 1,01,350 रुपये और 1 जून को भी दो किस्तों में 1,08,417 रुपये का भुगतान किया गया। 1 जून को 57,742 रुपये अंतिम किस्त के रूप में दर्ज है। इस तरह 10 अप्रैल से 1 जून के बीच महज 53 दिनों में कुल 13 बार में 6,74,452 रुपये का सरकारी धन फर्जी खाते में ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन सत्यापन तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी।
बैक डेट में ऑनबोर्डिंग
जांच में यह भी तथ्य सामने आया है कि फर्जी शिक्षिका तनुश्री को अविनाश राज द्वारा बैक डेट में ऑनबोर्ड किया गया था। तनुश्री को 29 मार्च 2026 को एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल पर तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) की अटैच आईडी का इस्तेमाल कर अप्रैल 2025 में बैक डेट नियुक्ति दिखाकर सिस्टम में दर्ज किया गया।
हरियाणा के जनधन खाते में पहुंची रकम
ऐसे में तत्कालीन डीईओ और तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के कार्यकाल में हुई इस पूरी प्रक्रिया की भूमिका सीधे तौर पर संदेह के घेरे में है। वहीं, जिस तनुजा देवी के खाते में राशि पहुंची, वह बैंक खाता 3 अगस्त 2019 को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुख्य शाखा में खोला गया था, जो कि एक जनधन मित्रा सेविंग अकाउंट था।
ट्रेजरी और मेकर-चेकर की भूमिका पर उठे बड़े सवाल
घोटाले की इस कड़ी में सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक ही दिन में कई बार वेतन भुगतान करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या प्रत्येक भुगतान से पूर्व संबंधित शिक्षिका के सेवा अभिलेख, पदस्थापन, बैंक विवरण और वेतन पात्रता का अनिवार्य सत्यापन किया गया था?
यदि किया गया, तो इतनी बड़ी हेराफेरी पकड़ में क्यों नहीं आई? इसके साथ ही स्थानीय ट्रेजरी कार्यालय ने भी एक ही कर्मचारी के नाम पर एक ही दिन में कई बिल प्रस्तुत किए जाने पर कोई आपत्ति दर्ज क्यों नहीं की? इन सभी पहलुओं पर अब विजिलेंस और विभागीय जांच का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
"वेतन भुगतान में सामने आई इस गंभीर गड़बड़ी के बाद पूरे मामले की गहन समीक्षा की जा रही है। डीईओ, डीपीओ, सभी बीईओ, लेखापाल और वेतन विपत्र तैयार करने वाले मेकर-चेकर को कड़े निर्देश जारी किए जा चुके हैं। पोर्टल पर केवल वैध शिक्षकों की ही प्रविष्टि हो और नियमानुसार ही वेतन निर्गत किया जाए। ऐसे मामलों की पूरी संवेदनशीलता से जांच की जा रही है, इसमें संलिप्त दोषी किसी भी सूरत में गंभीरतम दंडात्मक कार्रवाई से बच नहीं पाएंगे।"
