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केरल से भागलपुर लाकर खपाते थे घातक MDMA ड्रग; नाइजीरियन एजेंटों से जुड़े तार, तीन बड़े तस्करों के नाम जुड़े

Published: Thu, 17 Sep 2026 09:45 AM (IST)

Bhagalpur Kerala Drug Syndicate MDMA Smuggling Case: केरल पुलिस ने भागलपुर में अंतरराज्यीय MDMA ड्रग सिंडिकेट के तीन मुख्य तस्करों ...और पढ़ें

Bhagalpur Kerala Drug Syndicate MDMA Smuggling Case: भागलपुर में छिपा था 13 किलो ड्रग सिंडिकेट का मास्टरमाइंड! केरल SIT ने दबोचा, कोलकाता से दिल्ली तक फैले हैं तार

Bhagalpur Kerala Drug Syndicate MDMA Smuggling Case: भागलपुर में छिपा था 13 किलो ड्रग सिंडिकेट का मास्टरमाइंड! केरल SIT ने दबोचा, कोलकाता से दिल्ली तक फैले हैं तार

HighLights

  1. केरल पुलिस ने भागलपुर में तीन अंतरराज्यीय MDMA तस्करों को गिरफ्तार किया।

  2. गिरोह नाइजीरियन एजेंटों के साथ घातक सिंथेटिक ड्रग का व्यापार करता था।

  3. MDMA केरल से भागलपुर लाकर अन्य राज्यों में गुप्त रूप से बेचा।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Kerala Drug Syndicate MDMA Smuggling Case: केरल से भागलपुर पहुंचकर छिपे अंतरराज्यीय मादक पदार्थ गिरोह के तीन शातिर तस्करों की गिरफ्तारी के बाद अब इस सिंडिकेट के अंतरराष्ट्रीय व देशव्यापी नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। इंस्पेक्टर संगीत पुनाथिल के नेतृत्व में भागलपुर पहुंची केरल पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की तकनीकी जांच और गहन पूछताछ में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 13 सितंबर 2026 को भागलपुर से पकड़े गए मुहम्मद हैरिस, सलाहउद्दीन और अखिल जॉय प्रयोगशाला में बनने वाले सबसे घातक सिंथेटिक ड्रग मेथिलीनडाई-ऑक्सी-मेथामफेटामीन (MDMA) की तस्करी के बड़े सिंडिकेट का संचालन कर रहे थे।

जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह गिरोह केरल से सिंथेटिक ड्रग की खेप सीधे भागलपुर लाता था और यहां गुप्त ठिकानों पर रखने के बाद पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के विभिन्न शहरों में चोरी-छिपे आपूर्ति करता था। इस संगठित तस्करी में पश्चिम बंगाल और दिल्ली में सक्रिय कई नाइजीरियन और अफ्रीकी एजेंट भी इनके साथ सीधे जुड़े हुए थे।

कोलकाता से भागकर भागलपुर पहुंचे थे तस्कर, तकनीकी सर्विलांस से दबोचे गए

केरल एसआईटी के अनुसार, इस गिरोह के खिलाफ केरल में 26 जून 2026 और 6 अगस्त 2026 को 780 ग्राम एमडीएमए की जब्ती और सात तस्करों की गिरफ्तारी के बाद गहन अनुसंधान शुरू हुआ था। इस दौरान गिरोह का प्रमुख सूत्रधार मुहम्मद हैरिस फरार होकर पश्चिम बंगाल पहुंच गया था।

केरल पुलिस ने जब कोलकाता के बड़ा बाजार, खिदिरपुर डॉक एरिया और सांतरागांछी में दबिश दी, तो वहां इस सिंडिकेट की जड़ें काफी गहरी मिलीं। पुलिस की भनक लगते ही हैरिस कोलकाता से भागकर भागलपुर स्थित अपने गुप्त ठिकाने पर आ गया। कुछ ही दिनों में उसका मुख्य व्यापारिक साझीदार सलाहउद्दीन भी भागलपुर पहुंच गया, जबकि उनका तीसरा साथी अखिल जॉय पहले से ही भागलपुर में मौजूद था। तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन के आधार पर केरल पुलिस की टीम ने भागलपुर पुलिस के सहयोग से तीनों को एक साथ दबोच लिया। इनके पास से जब्त मोबाइल फोन और लैपटॉप से ड्रग तस्करी के कई अहम व्हाट्सऐप चैट, रूट और विदेशी एजेंटों के कॉन्टैक्ट नंबर मिले हैं, जिसके आधार पर दिल्ली और कोलकाता में भी छापेमारी की तैयारी है।

हैरिस और सलाहउद्दीन बराबर के पार्टनर, मंजेरी मॉल में हुई थी भारी बरामदगी

पूछताछ में यह बात पुख्ता हुई है कि इस अवैध धंधे में मुहम्मद हैरिस और सलाहउद्दीन बराबर के व्यावसायिक पार्टनर हैं। 6 अगस्त 2026 की शाम केरल के मंजेरी-कोझिकोड रोड स्थित लैडर मॉल के टेरेस अपार्टमेंट के कमरा नंबर 8802 में छापेमारी के दौरान पुलिस ने 97.71 ग्राम प्रतिबंधित सिंथेटिक ड्रग और बिक्री से मिले 3.80 लाख रुपये नकद बरामद किए थे।

इसके बाद की गई त्वरित कार्रवाई में पुलिस ने हैप्पी लॉज परिसर में खड़ी एक सफेद रंग की इनोवा क्रिस्टा कार से 12.312 किलोग्राम घातक सिंथेटिक ड्रग्स बरामद किया था। इस पूरे मामले में हैरिस और सलाहउद्दीन मुख्य योजनाकार थे, जो माल को नाइजीरियन एजेंटों के जरिए दिल्ली और बड़े महानगरों की हाई-प्रोफाइल सोसायटियों और नाइट क्लबों में ऊंची कीमतों पर खपाते थे।

  • 13 सितंबर को भागलपुर से गिरफ्तार केरल के तीनों तस्कर मुहम्मद हैरिस, सलाहउद्दीन और अखिल जॉय से केरल एसआईटी ने की विस्तृत पूछताछ

  • प्रयोगशाला में तैयार अत्यधिक घातक सिंथेटिक ड्रग 'एमडीएमए' (एक्स्टसी/मॉली) की तस्करी में लिप्त था अंतरराज्यीय गिरोह

  • केरल से भागलपुर लाकर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड में होती थी सप्लाई; कोलकाता व दिल्ली में नाइजीरियन व अफ्रीकन एजेंट करते थे मदद

  • केरल के मंजेरी में 12.312 किलोग्राम ड्रग्स और 3.80 लाख नकद बरामदगी केस से जुड़े हैं तार; एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज है केस

क्या है घातक सिंथेटिक ड्रग MDMA?

मेथिलीनडाई-ऑक्सी-मेथामफेटामीन (MDMA) को ड्रग्स के अवैध बाजार में 'एक्स्टसी' (Ecstasy) या 'मॉली' (Molly) के नाम से जाना जाता है। यह गांजा या चरस की तरह प्राकृतिक न होकर पूरी तरह केमिकल प्रोसेस से लैब में तैयार किया जाने वाला नशा है, जो आमतौर पर रंगीन गोलियों, कैप्सूल या सफेद क्रिस्टल पाउडर के रूप में मिलता है।

इसे लेने पर दिमाग में अत्यधिक उत्तेजना और एनर्जी का झूठा अहसास होता है, लेकिन इसके तुरंत बाद तेज बुखार, दिल की धड़कन का असामान्य होना, डिप्रेशन, किडनी फेलियर और अचानक मौत का गंभीर खतरा रहता है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) कानून के तहत इसका निर्माण, भंडारण और बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है। कानूनन 10 ग्राम से अधिक की मात्रा को ही 'कमर्शियल क्वांटिटी' माना जाता है, जिसमें 10 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान है। ऐसे में केरल मामले में 13 किलोग्राम की बरामदगी को देश के सबसे बड़े ड्रग जब्ती मामलों में से एक माना जा रहा है।