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8 लीटर दूध देने वाली गाय अब दे रही 2 लीटर दूध, बिहार के भागलपुर में अचानक ये क्या हुआ

Published: Fri, 04 Sep 2026 02:46 PM (IST)

भागलपुर जिले की महेषपुर-घनश्यामचक पंचायत में मवेशियों में खुरपका-मुंहपका बीमारी का प्रकोप फैल गया है, जिससे पशुपालक परेशान हैं और दूध उत्पादन में 80-90% की भारी कमी आई है।

मवेशियों में फैल रहा खुरपका-मुंहपका रोग, दुधारू पशु के दूध में भारी कमी

मवेशियों में फैल रहा खुरपका-मुंहपका रोग, दुधारू पशु के दूध में भारी कमी

HighLights

  1. महेषपुर-घनश्यामचक में मवेशियों में खुरपका-मुंहपका बीमारी का प्रकोप।

  2. दूध उत्पादन में 80-90 प्रतिशत तक की भारी कमी आई।

  3. पशुपालक उपचार और टीकाकरण की तत्काल मांग कर रहे हैं।

पंचायत सूत्र, महेशपुर-घनश्यामचक (सन्हौला)। महेशपुर-घनश्यामचक पंचायत के विभिन्न गांवों में पिछले करीब 15-20 दिनों से मवेशियों में खुरपका-मुंहपका बीमारी का प्रकोप दिख रहा है। इससे पशुपालक काफी परेशान हैं। इस बीमारी की चपेट में मुख्य रूप से गाय और भैंसें आ रही हैं।

पशुपालकों के अनुसार, इस बीमारी में पशुओं के मुंह और खुर में घाव हो रहे हैं। उन्हें चारा खाने और चलने-फिरने में परेशानी हो रही है तथा दूध उत्पादन में भी भारी कमी आई है। जानकारी के मुताबिक, खिरीडांर, वनगांव, खुर्दभुंडी, फरिदमपुर और महेशपुर गांवों में भारी संख्या में प्रभावित मवेशी मिले।

दूध देने में आ गई है 80-90 प्रतिशत की कमी

खिरीडांर निवासी पंकज कुमार ने बताया कि उनकी दोनों गायें करीब 15 दिनों से बीमार हैं। उपचार में करीब 3,500 रुपये खर्च हो चुके हैं।

वहीं, संतोष कुमार ने बताया कि बीमारी के दौरान उनकी एक गर्भवती गाय की मौत हो गई है, दूसरी गाय पहले करीब आठ लीटर दूध देती थी, जो अब घटकर करीब दो लीटर रह गया है।

पशुपालकों के अनुसार, एक पशु के इलाज में करीब 4000 रुपये या इससे अधिक खर्च हो रहे हैं। बीमारी के कारण दूध उत्पादन में करीब 80 से 90 प्रतिशत तक कमी आ गई है।

पशुपालकों का कहना है कि बीमारी से पशुओं की देखभाल और इलाज का खर्च बढ़ गया है। पशुपालक बीमारी पर नियंत्रण के लिए उपचार और टीकाकरण की मांग कर रहे हैं।

खुरपका-मुंहपका बीमारी संक्रामक है, जो संक्रमित पशु से दूसरे पशु में तेजी से फैलती है। इस बार वैक्सीन की उपलब्धता में देरी होने के कारण टीकाकरण अभियान देर से शुरू हुआ है। अब पंचायत में गांव-गांव टीकाकरण किया जा रहा है। बीमार पशुओं का टीकाकरण नहीं किया जा रहा है, जबकि स्वस्थ पशुओं को टीका लगाया जा रहा है। - डॉ. शहनवाज, प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारी, सन्हौला