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भागलपुर में स्थायी बाइपास के मेंटेनेंस पर सालाना 48 लाख खर्च, फिर भी अनगिनत गड्ढे; टोल प्लाजा के पास सड़क खस्ताहाल

Published: Tue, 15 Sep 2026 09:55 AM (IST)

Bhagalpur Bypass Road Condition: भागलपुर में स्थायी बाइपास सड़क के रखरखाव पर सालाना लाखों और मरम्मत पर करोड़ों खर्च होने ...और पढ़ें

Bhagalpur Bypass Road Condition: सालाना ₹48 लाख खर्च के बाद भी गड्ढों में तब्दील भागलपुर बाइपास! टोल प्लाजा के पास सड़क खस्ताहाल, हादसों का डर

Bhagalpur Bypass Road Condition: सालाना ₹48 लाख खर्च के बाद भी गड्ढों में तब्दील भागलपुर बाइपास! टोल प्लाजा के पास सड़क खस्ताहाल, हादसों का डर

HighLights

  1. भागलपुर बाइपास पर सालाना 48 लाख खर्च, फिर भी गड्ढे।

  2. करोड़ों खर्च के बावजूद सड़क की बदहाली जस की तस।

  3. मास्टिक एसफाल्ट अधूरा छोड़ने से सड़क तेजी से जर्जर।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Bypass Road Condition:भागलपुर शहर के स्थायी बाइपास मार्ग के नियमित रखरखाव और मरम्मत पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाने के बावजूद स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। नेशनल हाईवे (एनएच) विभाग द्वारा प्रति किलोमीटर 50 हजार रुपये की दर से आठ किलोमीटर लंबे बाइपास के मेंटेनेंस पर हर महीने करीब चार से पांच लाख रुपये और सालाना 48 लाख रुपये का भुगतान संवेदक को किया जा रहा है।

इसके बावजूद पूरी सड़क पर अनगिनत जानलेवा गड्ढों की भरमार हो चुकी है। भारी-भरकम टोल टैक्स वसूलने के बाद भी राहगीरों और वाहन चालकों को इस जर्जर व बदहाल मार्ग से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे दिन-रात गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

विभाग ने जमुई के संवेदक बालकृष्ण भलोटिया को पांच साल के लिए मेंटेनेंस की जिम्मेदारी सौंपी है। पिछले तीन वर्षों में केवल मेंटेनेंस मद में तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि इससे पूर्व करीब तीन करोड़ रुपये सड़क दुरुस्तीकरण पर व्यय किए गए थे।

यानी कुल छह करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च किए जाने के बाद भी सड़क की बदहाली जस की तस है। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व छह करोड़ की लागत से चौधरीडीह से बरारी हाउसिंग बोर्ड मोड़ तक 7.5 किलोमीटर स्थायी बाइपास सड़क का जीर्णोद्धार कराया गया था, लेकिन सात-आठ महीने के भीतर ही सड़क फिर से उखड़ गई।

सबसे दयनीय स्थिति टोल प्लाजा और चौधरीडीह के समीप है, जहां टोल प्लाजा के आधा किलोमीटर के दायरे में ही 20 से अधिक जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं। रात के अंधेरे में गड्ढों की गहराई का सही अंदाजा न लगने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।

मास्टिक एसफाल्ट का काम अधूरा छोड़ने से उखड़ी गिट्टी

सड़क के तेजी से जर्जर होने के पीछे निर्माण और मरम्मत में तकनीकी लापरवाही सामने आई है। संवेदक को सड़क पर अलकतरा-गिट्टी (बिटुमिनस) की एक परत बिछाने के बाद उसके ऊपर मास्टिक एसफाल्ट बिछाने का कार्य पूरा करना था। मास्टिक एसफाल्ट की परत सड़क को मजबूत बनाती है और जलजमाव होने पर भी अलकतरा को उखड़ने नहीं देती।

  • प्रति किमी 50 हजार रुपये के हिसाब से आठ किमी लंबे बाइपास के मेंटेनेंस पर सालाना 48 लाख रुपये खर्च कर रहा एनएच विभाग

  • करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़क खस्ताहाल; टोल प्लाजा के आधा किलोमीटर के दायरे में ही बने हैं 20 से अधिक बड़े गड्ढे

  • बिटुमिनस की परत चढ़ाने के बाद मास्टिक एसफाल्ट बिछाने का काम संवेदक ने छोड़ा अधूरा, बारिश व वाहनों के दबाव से उखड़ी सड़क

  • काली मिट्टी वाले क्षेत्र में बेस मजबूत किए बिना निर्माण कराने से बार-बार धंस रही सड़क; तत्कालीन अभियंताओं की भूमिका की जांच जारी

ठेकेदार ने बिटुमिनस का काम तो कर दिया, लेकिन पूरी सड़क पर मास्टिक एसफाल्ट बिछाने का काम अधूरा ही छोड़ दिया। नतीजतन, आनन-फानन में कराई गई मरम्मत भारी वाहनों का दबाव और बारिश का पानी नहीं झेल सकी और पूरी सड़क की गिट्टियां उखड़ती चली गईं।

बेस मजबूत न होना बना मुख्य कारण, तत्कालीन अभियंताओं पर जांच

विदित हो कि वर्ष 2019 में नाथनगर दोगच्छी से बरारी हाउसिंग बोर्ड मोड़ तक 17 किलोमीटर लंबा यह बाइपास 235 करोड़ रुपये की लागत से चालू हुआ था। परिचालन शुरू होने के महज एक साल बाद ही कोहड़ा और टोल प्लाजा के बीच सड़क धंस गई थी। पिछले सात वर्षों में इस सड़क की नौ से दस बार मरम्मत कराई जा चुकी है, जिस पर 15 से 20 करोड़ रुपये खर्च हुए।

एनएच विभाग के अधिकारियों का मानना है कि निर्माण के दौरान मजबूत बेस (आधार) नहीं बनाना इस समस्या की मूल वजह है। सड़क का जो हिस्सा बार-बार धंसता है, वहां काली मिट्टी है। यदि निर्माण के वक्त मिट्टी की खुदाई कर वैज्ञानिक तरीके से बेस तैयार किया गया होता, तो यह नौबत नहीं आती। सड़क निर्माण के दौरान तैनात रहे तत्कालीन अभियंताओं की कार्यशैली की भी प्रशासनिक जांच चल रही है।

एनएच के अभियंता के अनुसार, मूल 17 किलोमीटर लंबे बाइपास का नौ किलोमीटर हिस्सा घोरघट से मिर्जाचौकी के बीच बन रही फोरलेन सड़क में समाहित हो चुका है, इसलिए अब केवल 7.5 किलोमीटर हिस्सा ही बाइपास के रूप में शेष है। इसे 11 करोड़ रुपये के कुल पैकेज (जिसमें 3 करोड़ रुपये से 5 साल तक का मेंटेनेंस शामिल है) के तहत संवेदक को सौंपा गया है।

बारिश से हुआ नुकसान, दुरुस्त करने का निर्देश

एनएच विभाग के अधीक्षण अभियंता अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि हालिया बारिश के चलते सड़क को काफी नुकसान पहुंचा है। संवेदक को अविलंब गिट्टी-अलकतरा डालकर सभी गड्ढों को दुरुस्त करने और सड़क को सुगम बनाने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया गया है।