गंगा की लहरों पर उजड़ गई मां की गोद! जहाज के शौचालय में जन्मा नवजात, JLNMCH भागलपुर पहुंचने से पहले 'खामोश'
Bhagalpur Ganga Boat Delivery Death: भागलपुर में गंगा नदी में जहाज के शौचालय में एक महिला ने बच्चे को जन्म ...और पढ़ें

Bhagalpur Ganga Boat Delivery Death: जाह्नवी से बरारी आ रहे जहाज पर गूंजी किलकारी, अस्पताल पहुंचने से पहले नवजात की मौत। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
जहाज के शौचालय में महिला ने बच्चे को जन्म दिया।
नवजात की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई।
छह दिनों में यह दूसरी ऐसी हृदयविदारक घटना है।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Ganga Boat Delivery Death: नौ महीने की उम्मीदें और आंखों में नन्हे मेहमान के दीदार का संजोया सपना गंगा की लहरों के बीच मातम में बदल गया। भागलपुर में गंगा पार से आ रहे जहाजों और नावों पर आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के खोखले दावों की एक बार फिर दर्दनाक हकीकत सामने आई है।
गुरुवार को जाह्नवी घाट से बरारी आ रहे जहाज पर सवार साहू परबत्ता निवासी 21 वर्षीय सुषमा देवी को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। जहाज पर कोई आपातकालीन चिकित्सा सुविधा न होने के कारण आनन-फानन में उन्हें जहाज के शौचालय में ले जाया गया, जहां उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। लेकिन जिस किलकारी से घर-आंगन गूंजना था, वह चंद पलों में हमेशा के लिए खामोश हो गई।
बरारी घाट से मायागंज ले जाते समय तोड़ा दम
जहाज जैसे ही बरारी घाट पहुंचा, वहां कैंप में तैनात चिकित्सक डॉ. रोशनी प्रसाद ने तुरंत प्रसूता और नवजात की जांच की। बच्चे की स्थिति बेहद नाजुक और सांसें उखड़ती देख प्राथमिक प्रक्रिया के बाद उसे फौरन एंबुलेंस से जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (मायागंज) भेजा गया।
हालांकि, अस्पताल की चौखट तक पहुंचने से पहले ही नवजात ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि समय से पूर्व (प्री-मैच्योर) प्रसव होने और तुरंत आवश्यक इनक्यूबेटर व लाइफ-सपोर्ट न मिल पाने के कारण बच्चे को बचाया नहीं जा सका। फिलहाल प्रसूता सुषमा देवी मायागंज अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
छह दिन के भीतर दूसरी घटना, 9 अक्टूबर को नाव पर मरा था बच्चा
गंगा पार के इस सफर में नवजात की असमय मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। महज छह दिन पहले, बीते 9 अक्टूबर को भी जाह्नवी चौक घाट से भागलपुर लाई जा रही संगीता कुमारी को प्रसव पीड़ा हुई थी और उन्होंने एसडीआरएफ की नाव पर ही बच्चे को जन्म दिया था। उस नवजात ने भी जन्म के 15 से 20 मिनट के भीतर दम तोड़ दिया था। उस वक्त परिजनों ने आरोप लगाया था कि घाट पर समय पर डॉक्टर और नर्स उपलब्ध नहीं थे।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
विक्रमशिला सेतु पर भारी वाहनों या निर्माण कार्य के चलते जब-तब लगने वाले जाम के बीच उत्तर और दक्षिण बिहार के मरीजों के लिए यह जलमार्ग ही एकमात्र सहारा बना हुआ है। नवगछिया और सीमांचल के इलाकों से गंभीर मरीजों को मायागंज लाया जाता है।
कब सुधरेगी व्यवस्था?
लगातार सामने आ रही इन हृदयविदारक घटनाओं ने साबित कर दिया है कि घाटों और जहाजों पर स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं सिर्फ कागजी हैं। न तो जहाजों पर बुनियादी डिलीवरी किट और ऑक्सीजन की व्यवस्था है और न ही घाटों पर एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मुस्तैद रहती है। यदि प्रशासन ने समय रहते इस संवेदनशील रास्ते पर विशेषज्ञ चिकित्सा टीम तैनात नहीं की, तो इसी तरह सिस्टम की नाकामी की भेंट मासूम चढ़ते रहेंगे और मांओं की गोद सूनी होती रहेगी।
