भागलपुर, जेएनएन। ट्रेन परिचालन शुरू होने के बाद भागलपुर से मुंबई तक चलने वाली लोकमान्य तिलक टर्मिनल सुपरफास्ट के एलएचबी कोचों पर मंजूषा पेंटिंग दिखेगी। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। पेंटिंग पर करीब साढ़े तीन लाख खर्च होंगे। मुंबई के लोग बूढ़ानाथ मंदिर और बिहुला विषहरी का भी दीदार करेंगे। ट्रेन के कोचों में भागलपुर का विक्रमशिला विवि, सेतु से लेकर अन्य तरह के प्रसिद्ध चित्र रहेंगे। भागलपुर कोचिंग डिपो में मंजूषा पेंटिंग की जाएगी।

पेंटिंग में तीन रंग का होता है प्रयोग

पेंटिंग में तीन रंग हरा, गुलाबी और पीला का इस्तेमाल किया जाएगा। भगवान शिव की पुत्री विषहरी, बिहुला और चांदो सौदागर के अलावा चंपा फूल, सूर्य, चांद, हाथी, कछुआ, मछली, मैना पक्षी, कमल फूल, कलश, तीर, शिवलिंग, पौधे और बेलपत्र को भी उकेरा जाएगा। दरअसल, अभी भागलपुर-आनंद विहार टर्मिनल विक्रमशिला और एलटीटी के एक रैक में मंजूषा पेंटिंग होनी है। अभी ट्रेनों में मंजूषा पेंटिंग जंक्शन के दीवारों पर पेंटिंग कराई गई है। इस पेंटिंग में स्टेशन और प्लेटफार्म की दीवारों में सीता की विदाई, रेल इंजन, दुल्हन की डोली, जीव-जन्तु व पर्यावरण संरक्षण से संबंधित पेंटिग कराई गई है।

एक कोच पर 10 हजार होंगे खर्च

रेलवे अधिकारी ने बताया कि एक कोच पर पेंटिंग कराने पर आठ से 10 हजार खर्च होंगे। दो ट्रेन के 40 कोचों पर 3.20 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। रेल अधिकारी ने बताया कि परिचालन शुरू होने के बाद कोचों में पेंटिंग कराने का काम शुरू होगा।

भागलपुर की लोक कला है मंजूषा

जिस तरह मिथिला की लोक कला मधुबनी पेंटिंग है। उसी तरह भागलपुर की यह प्रसिद्ध कला है। बकायदा, मंजूषा आर्ट के लिए भागलपुर में प्रशिक्षण केंद्र भी है। मंजूषा पेंटिंग का तीन माह कोर्स कराया जाता है। यहां से प्रशिक्षण लेने के बाद सरकार की ओर से टूल किट उपलब्ध कराए जाते हैं। मंजूषा कला रोजगार प्राप्‍त करने का भी माध्‍यम है। इस कला की प्रसिद्धि भागलपुर में ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में है।

 

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