विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भागलपुर के 6 साल के रियान ने सिंगापुर में लहराया तिरंगा; आसियान शतरंज चैंपियनशिप में 5 पदक जीत रचा अनोखा इतिहास

Published: Mon, 17 Aug 2026 09:14 AM (IST)

भागलपुर के 6 वर्षीय रियान सिद्धार्थ ने सिंगापुर में आयोजित आसियान प्लस शतरंज चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ...और पढ़ें

दवाई पट्टी निवासी पवन झुनझुनवाला के पोते रियान ने आसियान प्लस शतरंज में जीते 3 रजत और 2 कांस्य पदक

दवाई पट्टी निवासी पवन झुनझुनवाला के पोते रियान ने आसियान प्लस शतरंज में जीते 3 रजत और 2 कांस्य पदक

HighLights

  1. 6 वर्षीय रियान सिद्धार्थ ने सिंगापुर में 5 पदक जीते।

  2. आसियान प्लस शतरंज चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

  3. भागलपुर के इस नन्हे खिलाड़ी ने देश को गौरवान्वित किया।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर की माटी के लाल ने अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर देश और जिले का नाम रोशन कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भागलपुर के प्रसिद्ध दवाई पट्टी स्थित 'पवन मेडिकल स्टोर्स' से जुड़े पवन कुमार झुनझुनवाला के छह वर्षीय पोते रियान सिद्धार्थ ने सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित 'आसियान प्लस शतरंज चैंपियनशिप' में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल पांच पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। आठ अगस्त 2026 को ही अपना छठा जन्मदिन मनाने वाले नन्हे रियान के इस शानदार प्रदर्शन से पूरे खेल जगत और जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है।

रियान ने क्लासिकल (शास्त्रीय) और रैपिड (तीव्र गति) शतरंज की व्यक्तिगत स्पर्धाओं में अपने अद्भुत खेल कौशल का परिचय देते हुए दो कांस्य पदक हासिल किए। वहीं, भारतीय टीम का हिस्सा बनते हुए उन्होंने क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज की तीनों टीम स्पर्धाओं में शानदार खेल दिखाते हुए तीन रजत पदक अपने नाम किए। इस प्रकार उन्होंने कुल 2 कांस्य और 3 रजत पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

5 वर्ष की उम्र में थामे मोहरे, कम समय में बनाई खास पहचान

रियान ने महज पांच वर्ष की उम्र में शतरंज के मोहरों की चाल को समझना शुरू किया था। बहुत कम समय में ही उन्होंने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और रणनीति के दम पर जिला एवं राज्य स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में कई प्रतिष्ठित ट्रॉफियां और पदक अपनी झोली में डाले।

इसी वर्ष उडुपी में आयोजित 'कर्नाटक राज्य स्कूल शतरंज चैंपियनशिप' में रियान ने बेंगलुरु का प्रतिनिधित्व किया था, जहां उन्होंने छह कड़े मुकाबलों में चार अंक अर्जित कर शीर्ष पांच में जगह बनाई। इसके अलावा कर्नाटक राज्य स्कूल टीम चैंपियनशिप में अपने विद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने स्वर्ण और रजत पदक पर कब्जा जमाया था।

भागलपुर से बेंगलुरु तक जश्न का माहौल]

रियान के पिता नमन सिद्धार्थ और माता आश्मा चौधरी वर्तमान में बेंगलुरु में कार्यरत हैं, लेकिन परिवार की जड़ें रेशमी शहर भागलपुर से जुड़ी हैं। उनके दादा पवन कुमार झुनझुनवाला भागलपुर शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायियों में गिने जाते हैं।

महज छह वर्ष की उम्र में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व करते हुए वैश्विक मंच पर 5 अंतरराष्ट्रीय पदक जीतना रियान की असाधारण खेल प्रतिभा को दर्शाता है। रियान अब भारतीय शतरंज के सबसे उभरते नन्हे सितारों में शुमार हो चुके हैं। परिजनों और खेल प्रेमियों को पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में वह ग्रैंडमास्टर बनकर देश के लिए और भी बड़े वैश्विक कीर्तिमान स्थापित करेंगे।