संवाद सहयोगी, भागलपुर। राज्य के किसान जल्द फसल अवशेष पराली को बायोचार में तब्दील कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाएंगे। बायोचार पर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के विज्ञानी डा. राजीव कुमार गुप्ता ने आनलाइन प्रशिक्षण के माध्यम से जानकारी दी। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डा. आरके सोहने, डा. स्वराज दत्ता, डा. अंशुमान कोहली सहित वरीय विज्ञानी आनलाइन जुड़े। निदेशक डा. सोहने ने कहा कि जल्द उक्त विश्वविद्यालय के साथ करार किया जाएगा और यहां के विज्ञानियों और किसानों को भी इस दिशा में प्रशिक्षण देकर फसल अवशेष से बायोचार बनाने की जानकारी दी जाएगी, ताकि मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सके। इसके लिए विवि प्रशासन की ओर से कवादय शुरू शुरू कर दी गई है।

- पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के विज्ञानी ने पराली से बनाया बायोचार, बीएयू करेगा करार

- फसल अवशेष से किसानी में मिलेगा फायदा

कैसे बनाया जाता है बायोचार

जिस प्रकार लकड़ी को जलाकर कोयला बनाया जाता है उसी प्रकार फसल अवशेष को जलाकर उसे कोयले का रूप दिया जाता है। तैयार इस कोयले को किसी चूल्हे में नहीं जलाया जाता, बल्कि इसका प्रयोग लंबे समय तक खेतों की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए मिट्टी में दबा दिया जाता है। मिट्टी में इस कोयले को मिला देने से उसकी उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। इससे जल धारण क्षमता भी बढ़ जाती है। नुकसानदेह गैस का उत्सर्जन भी कम होता है। बीएयू के अनुसंधान निदेशक डा. फिजा अहमद ने बताया कि पराली अब किसानों के लिए अभिशाप नहीं, बल्कि वरदान बनेगा। उसे बायोचार में तब्दील कर खेतों में लंबे समय तक कार्बन की मात्रा को स्थिर की जाएगी। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति को मजबूती मिलेगी।

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के विज्ञानी ने पराली से बायोचार बनाने में सफलता पाई है। राज्य के किसानों को भी विश्वविद्यालय इस दिशा में जागरूक करेगा। -डा. अरुण कुमार, कुलपति, बीएयू सबौर  

Edited By: Abhishek Kumar