अररिया [अशोक झा]। नेपाल द्वारा काफी दिनों के बाद पैदल यात्रियों के लिए आवागमन की अनुमति देने के बाद नेपाल के मील व अन्य संस्थानों में काम करने वाले भारतीय कामगार एक बार पुन: काम पर लौटने लगे हैं। विगत चार दिनों से जोगबनी सीमा होकर नेपाल जाने वाले मजदूरों की तादाद पांच सौ के पार देखा गया। सभी बंगाल के कूच बिहार के रहने वाले हैं जो शुरू से नेपाल में काम करते आए है।

कोरोना को लेकर विगत 18 माह से बंद नेपाल द्वारा 12 अगस्त को मुख्य सीमा होकर पैदल यात्रियों की अनुमति प्रदान करते ही लोगों के लिए रोजगार के द्वार भी खोल दिए। जिस कारण नेपाल के मील व अन्य संस्थानों में काम करने वाले भारतीय के चेहरे पर खुशी हैं। लोग बस एवं भाड़े के वाहनों से जोगबनी के रास्ते नेपाल जा रहे है ऐसे लोगों में बंगाल के मजदूरों की संख्या अधिक हैं। इस संबंध में मजदूर तपन बर्मन एवं रवि बर्मन ने बताया कि हमलोग शुरू से परिवार के साथ नेपाल में रह कर ईट भ_ा एवं स्टील फैक्टरी में काम करते हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण फैक्ट्री बंद होने के कारण बेरोजगार हो अपने घर चले गए थे। पुन: आवागमन बहाल किये जाने के बाद मालिक के बुलावे पर काम करने नेपाल जा रहे हैं।

इस संबंध में आनंद ईट भ_ा मालिक विशाल शर्मा एवं मोरंग उद्योग संगठन के राकेश सुराना ने बताया कि नेपाल के अधिकांश फैक्ट्री जैसे बिस्कुट, स्टील एवं ईट भ_ा आदि में भारतीय मजदूर काम करते हैं जो कोरोना में नेपाल द्वारा जारी लाकडाउन के कारण घर चले गए थे अब जबकि नेपाल ने लोगों के आवागमन तथा फैक्ट्री के संचालन की अनुमति दे दी है। भारतीय कामगारों को बुला लिया गया है।

इमीग्रेसन अधिकारी एवं एसएसबी भी रहे सक्रिय

बंगाल से आने वाले लोगों पर इमीग्रेसन के अधिकारी भी सीमा पर सक्रिय दिखे। उनके द्वारा पहचान पत्र की जांच की जा रही थी क्योंकि उनका मानना है कि बंगाल से आने वाले मजदूरों के नाम पर बंगलादेशी घुसपैठिए भी तो नहीं शामिल हो जा रहे है। इस कारण सीमा पर तैनात इमीग्रेसन अधिकारी एवं एसएसबी के जवान नेपाल जाने वाले प्रत्येक मजदूरों का आधार कार्ड एवं पूरा पता लिखते देखे जा रहे थे।

 

Edited By: Abhishek Kumar