भागलपुर [जेएनएन]। शिलान्यास और उद्घाटन का शिलापट्ट बनाने वाले कारीगारों की हालत पूरी तरह चरमरा गई है। आचार संहिता और लोकसभा चुनाव के कारण इनके पास अगले छह महीने तक कोई काम नहीं है। ऐसे में इनके भरोसे जी रहे दर्जनों परिवार के समक्ष दो जून की रोटी की समस्या हो रही है। अब सभी को चुनाव समाप्ति और सरकारी योजनाओं के शुभारंभ का इंतजार है।

दरअसल, भागलपुर में आधा दर्जन से अधिक जगहों पर शिलान्यास और उद्घाटन बोर्ड बनाने का काम होता है। मार्बल पर ये कारीगर छेनी-हथौड़ी से योजना का नाम, उद्घाटनकर्ता, राशि और जगह लिखने का काम करते हैं। लोकसभा चुनाव के लिए 10 मार्च से आचार संहिता लागू हो जाने के बाद इन कारीगरों के पास काम का संकट हो गया है।

15 से 20 शिलापट्ट का मिलता था ऑर्डर

शिलान्यास और उद्घाटन बोर्ड के लिए जिन कारीगरों के भरोसे नेता और सरकारी बाबू रहते हैं, उनका हाल लेने वाला इस चुनावी मौसम में कोई नहीं है। घंटाघर के पास वर्षो से शिलापट्ट बनाने वाले कारीगर मुकेश कुमार ने बताया कि महीने में छोटा से बड़ा मिलाकर करीब 15 से 20 शिलापट्ट बनाने का काम मिलता था। मुकेश ने बताया कि अभी काम पूरी तरह बंद है। दो वाय ढाई साइज के शिलापट्ट बनाने के लिए 1500 रुपये मजदूरी मिलती है। वहीं दो वाय डेढ़ साइज का 800 रुपये मिलते थे।

कई जुड़े दूसरे रोजगार तो कुछ हुए पलायन

इस कारोबार से जुड़े कई कारीगर चुनाव समाप्ति तक दूसरे रोजगार करने में लगे हैं। वहीं, कुछ रोजगार की तलाश में जिले से पलायन कर गए। मुकेश के साथ काम करने वाले कारीगर छोटू पंडित काम की तलाश में बांका के बौंसी चला गया। इसी तरह सोनू और रामप्रकाश भी दूसरे धंधे में लग हुआ है। इनका कहना है कि जब तक चुनाव समाप्त नहीं हो जाता तब तक काम नहीं मिलेगा।

Posted By: Dilip Shukla