भागलपुर, जेएनएन। धोखाधड़ी के मामले में आरोपित का गिरफ्तारी वारंट कहलगांव थाना से गायब है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) कोर्ट से एक साल में दो बार वारंट निर्गत किया गया था। एक वारंट जून 2018 और दूसरा जून 2019 को निर्गत किया गया था। पुलिस की लापरवाही का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि डेढ़ साल में आरोपित को गिरफ्तार नहीं कर सकी। वारंट तक थाने से गायब हो गए।

बसंतपुर पीरपैंती निवासी भुवनेश्वर प्रसाद सिंह के पुत्र अनिल कुमार सिंह ने 28 मई 2018 को अधिवक्ता शेखर सिंह के माध्यम से सीजेएम कोर्ट में चेक बाउंस होने का नालसी मुकदमा किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि शिव-पार्वती नगर, कहलगांव निवासी अरविंद कुमार ने 31 जनवरी 2018 को कुल 25 लाख रुपये के तीन चेक दिए थे। आठ-आठ लाख के दो और एक चेक नौ लाख रुपये का दिया था। चेक आइसीआइसी बैंक का थे। अनिल सिंह ने इसे एसबीआइ, लक्ष्मीपुर शाखा में अपने खाता में डाला था। सभी चेक बाउंस कर गए।

न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए आरोपित के खिलाफ 13 जून 2018 को गिरफ्तारी वारंट निर्गत किया था। गिरफ्तारी नहीं होने पर कोर्ट ने 29 जून 2019 को एसएसपी को रिमांइडर भेजा। कहलगांव थाना के दारोगा बाबूकांत झा ने एसएसपी कार्यालय से वारंट प्राप्त किया, लेकिन पुलिस आरोपित को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। दारोगा बाबूकांत झा का कहना है कि वारंट उन्होंने थाना के मुंशी को सौंप दिया था। दोनों में से एक भी वारंट नहीं मिल रहा है।

कहलगांव थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर गजेंद्र कुमार ने कहा कि न्यायालय द्वारा निर्गत दोनों वारंट के पीछे अधिकारी का नाम लिखकर मुंशी को सौंपा गया था। थाना में काफी खोजबीन की गई, लेकिन वारंट नहीं मिला। थाना से वारंट गायब है।

वारंट गायब हो जाना कहलगांव थाना पुलिस की घोर लापरवाही है। मामले की जांच कराई जाएगी। संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट से वारंट की कापी निकालकर आरोपित को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया गया है। -आशीष भारती, एसएसपी, भागलपुर।

Posted By: Dilip Shukla

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