Amit Shah in Bihar, आनलाइन डेस्क, भागलपुर: पूर्णिया में गृह मंत्री अमित शाह के आगमन को लेकर बीजेपी ने भरपूर तैयारियां की। इसका रिजल्ट शुक्रवार को इंदिरा गांधी स्टेडियम में देखने को मिला। हजारों की संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता और समर्थक दिखाई दिए। सूर्य की किरणें दोपहर तक अपने रंग में थी लेकिन शाह की हुंकार सुनने के लिए पहुंचे समर्थकों का जोश तपिश बढ़ते ही दोगुना होता जा रहा था। जैसे ही अमित शाह मंच पर पहुंचे, जोर-जोर से शंखनाद होने लगा। नमो-नमो, हर-हर मोदी और अमित शाह जिंदाबाद के नारे गूंज उठे। भारत माता की जय का जयघोष होने लगा। मंच पर मौजूद बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने इस पूरे नजारे को ऐतिहासिक बताया।

मंच पर मौजूद दिग्गज बार-बार इस ओर इशारा भी करते दिखाई दिए, खुद अमित शाह को भी रहा नहीं गया और उन्होंने वहां मौजूद मीडिया कर्मियों से कह दिया कि इस जनसैलाब को देखिए और दिखाइए। वे बार-बार पूर्णिया पहुंचे लोगों का अभिवादन करते दिखाई दिए।

कई मायनों में अहम है ये जनसभा

 भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सह केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की पूर्णिया में आयोजित जनसभा कई मायनों में अहम रही। यहां से वे मिशन 2024 का शंखनाथ कर गए। साथ ही विरोधियों को यह एहसास कराने का प्रयास किया कि भाजपा को बिहार में कमजोर समझने की भूल न करे। सीमांचल से अपने मूल एजेंडे के प्रति बचनबद्धता दोहराई। घुसपैठियों को लाल झंडी भी दिखाया। राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भाजपा नेता अमित शाह लगातार जोर देते रहे। कश्मीर से धारा 370 की चर्चा भी छिड़ी। इरादा साफ था। घुसपैठियों की बात पहले से मंच पर गूंज रही थी।

हिंदुत्व व राष्ट्रवाद के मुद्दे पर प्रखर बयान के लिए चर्चित केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी गरज चुके थे। पीएफआई पर भी मंच गूंजता रहा। पीएफआइ पर राज्य सरकार के स्तर से प्रतिबंध लगाने की मांग भी उठी। अमित शाह ने पूर्व के वक्ताओं पर जोरदार मुहर लगा दी। बार-बार वे यह कहते रहे कि सीमांचल वासियों डरने की कोई बात नहीं। राज्य में भाजपा सत्ता में नहीं है तो क्या हुआ उपर आपका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है।

इन मुद्दों से बात विकास पर भी गई। सीमांचल का झारखंड से साहिबगंज के रास्ते सड़क संपर्क की बड़ी योजनाएं भी उनके भाषण का हिस्सा रहा। गंगा पर बन रहे पुल के सहारे विकास के इरादे जताए गए। फोरलेन सड़क के साथ बिहार के विकास के लिए केंद्र के स्तर से मिली राशियां भी गिनाई गई। कल्याणकारी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। हिंदुत्व, राष्ट्रवाद के साथ विकास काे पार्टी का मूल मंत्र बताने का भरसक प्रयास किया गया।

यह भी जताया गया कि इन मुद्दों पर ही मिशन 2024 में भाजपा विरोधियों से दो-दो हाथ करेगी। यह उसका शंखनाथ भी था। रैली में प्रदेश के कद्दावरों का भी जुटान था। हर गणित से मंच सजा हुआ था। कभी भाजपा को बिहार में चरम पर ले जाने वालों का भी सम्मान मंच पर था। इसके अलावा नेतृत्व बदलाव की गणित भी झलक रही थी।

जातीय गणित के लिहाज से भी मंच मजबूत प्रतीत हो रहा था। मिशन 2024 में हर वर्ग तक दस्तक देने के मूड में है। हर गली-हर मोहल्लों में पहुंचने का इरादा रैली के सहारे ही जता दिया गया। संगठन को भी धार देने की कोशिश की गई। इसी उद्देश्य से पूर्णिया के बाद किशनगंज में केंद्रीय गृह मंत्री का रात्रि विश्राम भी तय है।

बहरहाल, बीजेपी ने पूर्णिया कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बड़ी तैयारी की थी। दिग्गजों ने पूर्णिया और इसके आसपास के कई जिलों में मैराथन बैठकें की। जिला-विधानसभा-प्रखंड-पंचायत और गांव तक के कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया। उसी का फलसफा रहा कि शुक्रवार को कार्यक्रम स्थल खचाखच भरा नजर आया।

Edited By: Shivam Bajpai