भागलपुर [ललन तिवारी]। देश में हो रहे जलवायु परिवर्तन का असर फसलों के पैदावार पर पड़ रहा है। तापमान बढऩे का अगर यही गति बना रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में पैदावार 25 प्रतिशत तक घट सकता है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर में जलवायु परिवर्तन का फसलों के उत्पादन पर असर को लेकर हो रहे शोध के दौरान इस बात का पता चला है।

बीएयू में विगत 56 वर्षों के डाटा के अध्ययन से पता चला है कि पिछले 15 वर्षों में तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है, जिससे तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। अगर यही हाल रहा तो तापमान में पांच डिग्री सेल्सियस तक का इजाफा हो सकता है, इससे फसलों का पैदावार एक चौथाई तक घट सकता है। इससे लिए किसानों को नई तकनीक अपनाना होगा। इससे फसलों के उत्पादन पर भी असर नहीं पड़ेगा।

जलवायु परिवर्तन में कृषि की भूमिका कम करने पर भी जोर

जलवायु परिवर्तन पर रिसर्च कर रहीं महिला वैज्ञानिक सुवर्णा राय ने बताया कि प्रत्येक एक से डेढ़ किलोमीटर पर तापमान में अंतर हो रहा है। तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन में कृषि क्षेत्र की भूमिका कम करने पर भी शोध हो रहा है। विश्व में हो रहे जलवायु परिवर्तन में कृषि क्षेत्र की भूमिका 18 प्रतिशत है। फसलों से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने के लिए बीएयू नई तकनीक से खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित करेगा।

बिहार में पहली बार हो रहा इस तरह का शोध

जलवायु परिवर्तन का फसलों के उत्पादन पर असर से संबंधित शोध बिहार में पहली बार हो रहा है। शोध में पाया गया कि बिहार के जोन एक में अधिकतम तापमान कम हो रहा है। वहीं, जोन दो, तीन-ए और तीन-बी में तापमान बढ़ रहा है। न्यूनतम तापमान सभी जोन में बढ़ रहा है, जो फसलों के विकास में बाधक है। जोन दो और तीन-बी में औसत बारिश कम हो रही है। वहीं, जोन एक और तीन-ए में बारिश अत्यधिक होती है। इससे एक ही समय में उत्तर बिहार में बाढ़ और दक्षिण बिहार में किसान सूखे की मार झेल रहे हैं।

शून्य जुताई पर गेहूं की फसल लगाएं

प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आरके सोहाने ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का एक मुख्य कारण बड़ी मात्रा में ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन है। धान की सीधी बोआई करने और शून्य जुताई पर गेहूं का फसल लगाने से ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन कम हो जाता है। वहीं, इससे फसलों के उत्पादन लागत में कमी और पैदावारी में बढ़ोतरी होगी।

चार जोन में बांटा गया है पूरा बिहार

कृषि जलवायु के अध्ययन के लिए बिहार को जोन एक, दो, तीन-ए व तीन-बी में बांटा गया है। जोन एक में पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सिवान, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, मुधबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, गोपालगंज, बेगूसराय को शामिल किया गया है। जोन दो में पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, खगडिय़ा, अररिया व किशनगंज शामिल है। जोन तीन-ए में शेखपुरा, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, भागलपुर और बांका शामिल है। वहीं, जोन तीन-बी में रोहतास, भोजपुर, बक्सर, भभुआ, अरवल, पटना, नालंदा, नवादा, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया जिला आता है।

आने वाले कुछ वर्षों में अधिकतम तापमान में पांच डिग्री तक की बढ़ोतरी हो सकता है। बीएयू में इसपर शोध जारी है। अब तक हुए अनुसंधान में तापमान में लगातार हो रही वृद्धि का पता चला है। फसलों का उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए किसानों को नई तकनीक से खेती के बारे में जानकारी दी जाएगी। - डॉ. अजय कुमार सिंह, कुलपति बीएयू सबौर

Posted By: Dilip Shukla

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप