भागलपुर। कृषि शिक्षा के पाठ्यक्रम में समय के अनुसार बदलाव के लिए देश भर के विशेषज्ञ बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर में मंथन कर रहे हैं। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से विश्वविद्यालय में दो दिवसीय हाईटेक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश के विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ एमएससी और पीएचडी के कोर्स में बदलाव की कवायद चल रही है।

मंगलवार कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि कमी को ध्यान में रख नवीनतम पाठयक्रम का समावेश किया जाए। शोध स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के आधार पर हो। भारत सरकार ने कृषि शिक्षा के पाठयक्रम को अद्यतन करने के लिए कई समितियों का गठन किया है। कार्यशाला में असम कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात कृषि विश्वविद्यालय, बनारस ¨हदु विश्वविद्यालय के अलावा कई राज्यों के संस्थानों से प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। मौके पर डीन एजी डॉ. आरआर सिंह, प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आरके सोहाने, डीन पिजिएस डॉ. बीसी साहा, बीज एवं प्रक्षेत्र निदेशक डॉ. आरपी सिंह, प्लानिंग डायरेक्टर डॉ. अरुण कुमार आदि सहित दर्जन भर से ज्यादा संस्थानों के प्रतिभागी उपस्थित थे। 85 फीसद एकरूपता वाले कोर्स होंगे

कार्यशाला में आए मुख्य अतिथि बीएसएमएस के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण सिंह राठौर ने बताया कि देश के जितने कृषि के शिक्षण संस्थान हैं उनमें 85 प्रतिशत एकरूपता वाला कोर्स होगा। वहीं 15 फीसद कोर्स में स्थानीयता का समावेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक दशक बाद उच्चशिक्षा के कोर्स में कुछ नवीन जोड़ा जाता रहा है। इस कारण कोर्स में बहुत कुछ बदलते हुए नई चीजों का समावेश किया जाएगा, जो रोजगारपरक और आने वाले दिनों में विद्यार्थियों का बहुआयामी विकास कर सकेगा।

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