भागलपुर [जेएनएन]। अलीगंज में 19 अप्रैल को छात्रा पर हुए तेजाब हमला मामले में पुलिस को फोरेंसिक और डीएनए जांच की रिपोर्ट का इंतजार है। यदि इस रिपोर्ट में कोई भी नई बात पीडि़ता और परिजन के विरोधाभाषी बयान से अलग आता है तो मामला नया मोड़ ले सकता है। हालांकि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा। एसएसपी आशीष भारती ने अपनी पहली जांच रिपोर्ट में भी फोरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट लेकर कई बिंदुओं पर जांच का आदेश दिया है। फोरेंसिक रिपोर्ट में घटना के तरीके के साथ किस तेजाब का प्रयोग जलाने के लिए किया गया था आदि का जिक्र होना है। वहीं, छात्रा का इलाज वाराणसी में किया जा रहा है।

फोरेंसिक की टीम ने किया था डेमो

घटना के दूसरे दिन फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया था। घटना के बारे में जानने के बाद टीम ने परिजनों द्वारा बताई गई घटना का डेमो भी किया था, ताकि पता चले कि यदि किसी का भी हाथ पकड़कर उस पर तेजाब फेंका जाए तो शरीर के किस किस भाग को नुकसान पहुंचेगा। पीडि़त छात्रा ने बताया था कि तीन नकाबपोश लड़के सीढिय़ों के रास्ते घर में प्रवेश कर गए। उसमें से एक ने उसका हाथ पकड़ लिया। जबकि अन्य ने उस पर तेजाब डाल दिया, लेकिन लड़की का दोनों हाथ समान तरीके से जख्मी हुआ है। ऐसे में बताई गई घटना और जख्म में समानता नहीं है।

डीएनए से पता चल जाएगा किसका है कट्टा

पुलिस ने आरोपित प्रिंस भगत और राजा यादव के खून का नमूने डीएनए जांच के लिए भेजे हैं। जांच में पता चल जाएगा कि घर में छूटा कट्टा, थैला व रूमाल समेत अन्य सामान किसका है। यदि आरोपित और बरामद सामानों का डीएनए मिल जाता है तो निश्चित रूप से प्रिंस और राजा पर आरोप सिद्ध हो जाएगा। यदि कट्टा, झोले, रूमाल समेत अन्य सामानों पर आरोपितों का डीएनए मैच नहीं करता है तो आरोपितों को लाभ मिल सकता है। वहीं, पुलिस यह डीएनए रिपोर्ट से पता लगा लेगी कि बरामद सामान किसके हैं।

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Posted By: Dilip Shukla