Hashimoto Disease: बिहार में 8 साल की बच्ची दुर्लभ बीमारी से पीड़ित, क्या है हाशिमोटो रोग?
बिहार में एक आठ साल की बच्ची हाशिमोटो नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। यह (Hashimoto) ऑटोइम्यून थायरॉइडिटिस है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरॉइड ग्रंथि पर हमला करती है। इस रोग के लक्षणों में थकान, वजन बढ़ना और कब्ज शामिल हैं। निदान रक्त परीक्षण से होता है और उपचार में थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी शामिल है। प्रारंभिक निदान से लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद मिलती है।

हाशिमोटो नामक दुर्लभ बीमारी। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, भागलपुर। JLNMCH के पूर्व प्राचार्य और शिशु विभागाध्यक्ष डॉ. आर.के. सिन्हा ने आठ वर्षीय बच्ची में हाशिमोटो थायरायडिटिस जैसी दुर्लभ बीमारी की पहचान कर उसे सही उपचार की दिशा दिखाई है। यह बीमारी थायरायड ग्रंथि पर शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली के हमले से पैदा होती है और बच्चों में इसके मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं।
मुंगेर के हवेली खड़गपुर निवासी चंद्रशेखर कुमार अपनी बेटी को 25 नवंबर को अस्पताल लाए थे। बच्ची पिछले दो वर्षों से कब्ज, थकान, मानसिक सुस्ती और शारीरिक निष्क्रियता जैसी परेशानियों से जूझ रही थी। कई चिकित्सकों से परामर्श के बावजूद निदान नहीं मिल पा रहा था।
डॉ. सिन्हा ने जांच के बाद बताया कि ऑटोइम्यून प्रक्रिया के कारण थायरायड की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होती जाती हैं, जिससे ग्रंथि सूजकर बड़ी दिखाई देने लगती है। इसी वजह से ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, भूख में कमी, पेट दर्द और दैनिक कार्यों में अरुचि जैसे लक्षण उभरते हैं।
उन्होंने कहा कि यह रोग बच्चों में काफी विरल है। करीब एक हजार में केवल एक-दो मामलों में ही ऐसे संकेत मिलते हैं। सही पहचान सामान्य चिकित्सकों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन समय पर निदान होने पर थायरायड हार्मोन की दवा देकर मरीज को सामान्य जीवन की ओर लौटाया जा सकता है।
डॉ. सिन्हा ने अभिभावकों को सलाह दी कि ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चे को विशेषज्ञ से अवश्य जांच कराएं, ताकि इलाज में देरी न हो।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।