जागरण संवाददाता, भागलपुर। मुल्लाचक शरीफ स्थित खानकाह शहबाजिया में हजरत शहबाज मुहम्मद भागलपुरी के 394वें तीन दिवसीय उर्स पाक के मौके पर दूसरे दिन शनिवार को उनके मजार पर गद्दीनशीं सैयद शाह इंतखाब आलम शहबाजी मियां साहब ने चादरपोशी की। इस मौके पर नातिया मुशायरा और तकरीर का भी आयोजन किया गया। भागलपुर, बांका और झारखंड के 16 छात्रों की दस्तार फजीलत और दस्तारबंदी भी की गई।

उर्स के दूसरे दिन खानकाह परिसर में स्थित शाहजहांनी मस्जिद में सुबह के सत्र में कुलशरीफ का आयोजन किया गया। दोपहर एक बजे गद्दीनशीं के आवास पर सरकारी फातेहा और लंगर का आयोजन किया गया। अशां की नमाज के बाद रात दस बजे सुल्तानुल आरफीन हजरत शहबाज मुहम्मद भागलपुरी रअ. के मजार पर सैयद शाह इंतखाब आलम शहबाजी मियां साहब ने चादरपोशी की। चादरपोशी के बाद विशेष दुआ की।

विशेष तकरीर की गई

रात ग्यारह बजे से शाहजहांनी मस्जिद में तकरीर व नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद खानकाह मुनीमिया मीतन घाट, पटना के सज्जादानशीं मौलाना डा. सैयद शमीम अहमद मुनअमी ने विशेष तकरीर पेश की।

छात्रों की हुई दस्तार फजीलत व दस्तारबंदी

सैयद शाह इंतखाब आलम शहबाजी की अध्यक्षता में आयोजित समारोह के दौरान बांका के मु. सलीम, साहबगंज (झारखंड) के मु. बेलाल खान, मु. आफान, भागलपुर के मु. शादाब आलम, मु. फैज आलम और मु. रेहान की दस्तार फजीलत की गई। बांका के मु. इंजमामुल हक, मु. फिरोज आलम, मु. तनवीर रजा, भागलपुर के मु. आफताब, मु. साकिब, मु. तौसीफ और मु. कैफी समेत सभी छात्रों के सिर पर पगड़ी बांधकर फाजिल और हाफिज की डिग्री सौंपी गई।

पेश किए गए नातिया कलाम

शाहजहांनी मस्जिद में खानकाह शहबाजिया के नाएब सज्जादा सैयद शाह शानदार आलम शहबाजी और मौलाना सैयद शाह शाहकार आलम शहबाजी की मौजूदगी व जबलपुर के मु. आरिफ सिद्दीकी के संचालन में नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। मुंबई के सलमान अशरफी, लखनऊ के हाफिज बैतुल्ला अहसन मीनाई, अब्दुल समद कोयल, कोलकाता के इश्तियाक रहबर, जुनैद अशरफ और आसनसोल के शमीम दाना ने नातिया कलाम पेश किए। समारोह के अंत में सलात व सलाम के बाद गद्दीनशीं ने सामूहिक दुआ की। इस मौके पर सैयद अहरार आलम शहबाजी, सैयद इबशार आलम शहबाजी के अलावा मदरसा जामिया शहबाजिया के हेड मुदर्रिस मुफ्ती मु. फारूक आलम अशरफी मिस्बाही समेत सभी खानवादा व बड़ी संख्या में मुरीदीन उपस्थित थे।

Edited By: Dilip Kumar Shukla