भागलपुर [बलराम मिश्र]। पुलिस-पब्लिक के बीच बेहतर समन्वय के लिए प्राइवेट कार्यालय की तर्ज पर थानों में मैनेजर तैनात किए गए हैं। मुख्यालय द्वारा थानों की व्यवस्था को स्मार्ट बनाने के उद्देश्य से भी यह अनूठा प्रयोग किया गया है। इनके हाथ व्यवस्था सुधारने के लिए खाली हैं। थानों में पूर्व से आत्मनिर्भरता फंड व्यवस्था के लिए दिया जाता है। थाना मैनेजर बनाने के बाद मेंटेनेंस के लिए कोई अलग से फंड नहीं दिया गया। ऐसे में थाना मैनेजर व्यवस्था को लेकर बगैर फंड के लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। अलग से बहाल होने वाले हैं मैनेजर

सभी थानों और पुलिस चौकी में थाना मैनेजरों की बहाली सरकार स्तर होनी है, लेकिन जब तक बहाली नहीं होती है तब तक सरकार ने थाने के ग्रेजुएट व तकनीकी रूप से दक्ष सिपाहियों को ही मैनेजर बनाने को कहा है। जिले के 44 थानों व पुलिस चौकी में थाना मैनेजर के रूप में वहां के एक सिपाही को बहाल कर दिया गया है। कौन सुनेगा दर्द

थाना मैनेजर के रूप में एक सिपाही को प्रतिनियुक्त कर दिया गया है। उन्हें थानों में आने वाले आगंतुकों के स्वागत, कक्ष में किसी भी तरह का इंतजाम करने या थानों को सुंदर बनाने के लिए किसी तरह फंड नहीं दिया गया है। ऐसे में उनके समक्ष असमंजस की स्थिति होती है। थानेदार को भी बड़ी परेशानी है। थाने से एक सिपाही भी कम हो गया है। उनसे वे बाहर लॉ एंड आर्डर में ड्यूटी भी नहीं करा सकते। सिविल ड्रेस में रहने का है निर्देश

पब्लिक से बेहतर संबंध स्थापित करने के लिए थाना मैनेजर को सिविल ड्रेस में थानों में रहना है। वे शिकायत लेकर आने जाने वाले व्यक्तियों का लेखा-जोखा अपने पास रखेंगे। उनकी बातों को संबंधित अफसरों तक पहुंचाएंगे। थानों में होने वाली किसी मीटिंग में आने वाले लोगों की सुविधाओं का ख्याल रखने की जिम्मेदारी भी मैनेजर की है।

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थानों व पुलिस चौकी को आत्मनिर्भरता फंड उपलब्ध कराया जाता है। इससे थानों व पुलिस चौकी में मेंटेनेंस का कार्य होता है। थाना मैनेजरों के लिए अलग से किसी फंड की व्यवस्था नहीं है।

- सुजीत कुमार

डीआइजी भागलपुर

Posted By: Jagran

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