भागलपुर, जेएनएन। कहलगांव के किसनदासपुर स्थित रेलवे की जमीन पर बने अस्थाई पुनर्वास स्थल रह रहे रानीदियारा के कटाव पीडि़तों के साथ बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक की। अधिकारियों ने उनसे पूछा कि स्थाई पुनर्वास के लिए आप कहां बसना चाहते हैं। कासडी के माधोपुर मौजा में 19 एकड़, पीरपैंती के हरिणकोल मौजा में 28 एकड़ एवं किसनदासपुर मौजा में पुनर्वास के लिए जमीन चिह्नित की गई है। चिह्नित जमीन पर कहां बसना चाहते हैं अपनी राय दें। इस पर कटाव पीडि़तों ने अपनी-अपनी सुविधानुसार राय दी।

अपर समाहर्ता राजेश झा राजा ने कहा कि कटाव पीडि़तों द्वारा शपथपत्र के द्वारा सहमति पत्र देने के बाद उन्हें चिह्नित जमीन पर भेजा जाएगा। इसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कहलगांव एसडीओ सुजय कुमार ङ्क्षसह ने ने कहा कि जब जमीन खरीदकर ही देनी है तो कटाव पीडि़तों की सुविधा का भी ख्याल रखना होगा। इसलिए पीडितों की राय जरूरी है। रानीदियारा में कहलगांव और पीरपैंती प्रखंड के कटाव पीडित हैं। बैठक में टपुआ गांव के कटाव पीडि़तों ने भी पुनर्वास की मांग की है।

बैठक में आपदा प्रभारी विकास कर्ण, राजस्व प्रभारी मोइद जिया, डीसीएलआर रवि कुमार चौहान, कहलगांव बीडीओ विजय कुमार सौरभ, कहलगांव एवं पीरपैंती के अंचलाधिकारी और पूर्व मुखिया निशिकांत मंडल, अगहनु मंडल, मुखिया जयनाथ महतों, अनंदी मंडल, गौरीशंकर विद्याथी, अविनाश कुमार उपस्थित थे।

कहलगांव नगर में लोग पी रहे गंगा का पानी

कहलगांव नगर पंचायत में पिछले चार दिनों से पेयजल की आपूर्ति नहीं हो रही है। इससे नगरपंचायत क्षेत्र में पानी के लिए हाहाकार मचा है। आलम है कि गंगा नदी का पानी पीकर ज्यादातर लोग अपनी प्यास बुझा रहे हैं। कुछ लोग बोतल बंद पानी खरीद कर काम चला रहे हैं। दरअसल, पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने के चलते पानी की आपूर्ति बाधित है, जिसकी मरम्मत का काम बुधवार तक पूरा नहीं हो सका था। मरम्मत बाद बोङ्क्षरग से पानी की आपूर्ति करते ही फिर से पाइप में लिकेज शुरू हो जाता है, जिसे सीमेंट और बालू से बंद किया जा रहा है। गुरुवार की शाम तक काम पूरा होने की उम्मीद है। नगर पंचायत के लोगों ने बताया कि चार दिनों से आपूर्ति बंद होने से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। गंगा नदी से ठेला या साइकिल पर पानी ढोकर ला रहे हैं, जिनके यहां चापानल या बोङ्क्षरग है उनके यहां सुबह-शाम इतनी भीड़ लगी रहती है सभी को पानी नहीं मिल पाता है। नगर पंचायत प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। उमस भरी गर्मी में पानी के लिए अलग से पसीना बहाना पड़ रहा है। इसको लेकर लोगों में काफी आक्रोश है।

Posted By: Dilip Shukla

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