भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र]। पुलिस से लुकाछिपी खेलने वाले जरायम पेशेवर खुद को हथियारों से लैस करने को पहले मुंगेर ही कूच करते हैं। ऐसा अब तक गिरफ्त में आए कई बदमाशों के स्वीकारोक्ति बयान में सामने आ चुका है।

इधर-उधर से जुटाई रकम से तमंचे-पिस्तौल, पिस्टल खरीद करते-करते मुंगेरिया कार्बाइन तक खरीद लेते हैं। 94 बैच के तेज तर्रार अवर निरीक्षक आरके सिंह की अगुआई में 2001 में पकड़े गए एक शातिर ने हथियारों की मंडी के कई रहस्य खोले थे। मुंगेरिया कारीगरों के ताल्लुकात का भी खुलासा हुआ था। तब भागलपुर के एक आग्नेयास्त्र विक्रेता का नाम भी हथियारों, कारतूसों की बिक्री में सामने आया था। तातारपुर थाना क्षेत्र के परवत्ती मोहल्ले के एक लॉज से गिरफ्तार उस शातिर ने मुंगेरिया कार्बाइन का रहस्य उजागर करते हुए बयान दिया था कि उसने 1999 में 25 हजार रुपये में कार्बाइन खरीदी थी। कहा जाता है कि वर्तमान समय में कारीगरों के मुंगेर स्थित अड्डे पर जाकर लेने में कीमत 70 हजार। उसे भागलपुर तथा आसपास में डिलीवरी देने पर 80 हजार की हो जाती है। मुंगेर के बरदह गांव से लेकर तौफल दियारा में अवैध हथियार बनाने वाले कारीगरों की भ रमार है। चर्चाओं पर यकीन करें तो नक्सलियों या घनिष्ठ आपराधिक गिरोहों को कार्बाइन 60 हजार रुपये में भी आपूर्ति कर दी जाती है। बताया जाता है कि ऐसे गिरोहों या पार्टी दस्ते से उन्हें थोक आर्डर मिलते और विश्वसनीयता भी बनी होती। नये तस्करों या ग्राहकों से कारीगर दूरी बना कर रखते हैं। उन्हें अपने अड्डे का पोशीदा राज नहीं बताते। पुलिसिया दबिश और चौकसी में उन्हें मुखबिरी का खतरा बना रहता है। कहा जाता है कि नये ग्राहकों, तस्करों से तयशुदा कीमतों पर ही मुंगेरिया कार्बाइन का सौदा करते हैं। वहां से अधिकांश कार्बाइन की डिलीवरी कारीगर खुद भागलपुर और आसपास के इलाके में कर दिया करते थे। सुपर एक्सप्रेस में वर्ष 2011 में पकड़े गए दो तस्करों ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में ऐसा खुलासा किया था। ऐसी डिलीवरी कारीगर विश्वस्त गिरोहों और नक्सली संगठनों तक की सीमित रखते हैं। उनसे उन्हें आ‌र्म्स मेंटेनेंस और पाट्स आपूर्ति का भी आर्डर मिलता है।

Posted By: Jagran

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