भागलपुर, जेएनएन। प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता दिन प्रतिदिन कम की जा रही है। निकट भविष्य में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि क्रियाकलापों पर भी दिखेगा। ऐसी परिस्थितियों और चुनौतियों से निपटने के लिए हमें कृषि के प्रति अपने दृष्टिकोण को बदलने की जरूरत है। उक्त बातें बिहार कृषि विश्वविद्यालय के छठे दीक्षा समारोह में कुलाधिपति फागु चौहान ने कही।

चार को गोल्ड मेडल, 274 को मिली उपाधि

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के छठे दीक्षा समारोह में कुलाधिपति फागू चौहान ने चार छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल प्रदान किया। साथ ही पीएचडी करने वाले 14 शोधार्थियों को प्रमाणपत्र और कुल 274 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई। बेस्ट पीएचडी थीसिस अवार्ड ऋषभ कुमार, एमएससी एग्रीकल्चर का गोल्ड मेडल बीसी अनु, बीएससी ऑनर्स एग्रीकल्चर का गोल्ड मेडल संजु कुमारी और बीएससी ऑनर्स हॉर्टीकल्चर का गोल्ड मेडल उषा किरण को प्रदान किया गया। बेस्ट टीचर का अवार्ड श्रीनिवास राघवन को दिया गया। साथ ही पीएचडी करने वाले नीरज कुमार, विनोद कुमार, आशीष चौरसिया, सुधीर कुमार, ऋषभ कुमार, राजेश कुमार, तेज प्रताप, विकास कुमार, श्रुति सुमन, मुख्तार अहमद, अमृता कुमारी, पुष्पा कुमारी, सुष्मा सिन्हा, नीतू आनंद को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

कुलाधिपति फागू चौहान पटना से हेलीकॉप्टर से बीएयू परिसर पहुंचे। कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह ने उनका स्वागत किया। इसके बाद शोभायात्रा निकाली गई। कुलाधिपति के मंच पर पहुंचते ही राष्ट्रगान हुआ। इसके बाद कुलपति ने दीक्षा समारोह शुरू करने के लिए कुलाधिपति से इजाजत मांगी। इजाजत मिलने के बाद कुलपति ने स्वागत भाषण देते हुए बीएयू की उपलब्धियों को गिनाया। कार्यक्रम के समापन पर शोभायात्रा निकालकर कुलाधिपति को विदा किया गया। कुलाधिपति के जाने के बाद छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई। शाम में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

छात्र-छात्राओं में उत्साह, खूब ली सेल्फी

दीक्षा समारोह के दौरान छात्र-छात्राओं के बीच गजब का उत्साह था। इस ऐतिहासिक क्षण को मोबाइल कैमरे में कैद करने के लिए होड़ लगी थी। कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पंडाल में मौजूद छात्र-छात्राएं सेल्फी लेने में व्यस्त दिखीं। अपनी जगह से उठकर वे जगह-जगह जाकर सेल्फी लेने में व्यस्त रहे।

कुलाधिपति के आने का समय नजदीक आने पर आयोजकों को उनलोगों से अपनी-अपनी जगह बैठने के लिए कई बार आग्रह करना पड़ा। विभिन्न कॉलेजों से आए शिक्षकों को भी फोटो लेते देखा गया। कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद छात्र-छात्राएं मंच पर जाकर सेल्फी लेते रहे। 

समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति फागू चौहान ने कहा कि कृषि शिक्षा, गुणात्मक शोध, प्रसार एवं प्रशिक्षण को मजबूती प्रदान करने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। विभाजन के बाद बिहार का विकास कृषि से संभव हो पा रहा है। यही कारण है कि बिहार का विकास दर देश के विकास दर से अधिक है। राज्य 15 फीसद की विकास दर से आगे बढ़ रहा है।

 

उन्होंने कहा कि कृषि के विकास में अनुसंधान का बहुत महत्व है। इस विश्वविद्यालय द्वारा कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में व्यवहारिक शोध की कई परियोजनाएं संचालित की जा रही है। जिनमें राज्य स्तरीय 270, राष्ट्रीय स्तर की 34 तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की नौ परियोजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर काफी संवेदनशील है। इस दिशा में सरकार की ओर से जल जीवन हरियाली कार्यक्रम शुरू किया गया है। ऐसे कार्यक्रमों का सफल क्रियान्वयन कृषि एवं सामाजिक जीवन को पूरी तरह लाभान्वित करेगा। देश में संचालित 74 कृषि विश्वविद्यालय की वरीयता सूची में बिहार विश्वविद्यालय 18 स्थान पर है। छात्र-छात्राओं, वैज्ञानिकों पदाधिकारियों के परिश्रम तथा सहयोग से वरीयता सूची में यह विश्वविद्यालय और अधिक बेहतर प्रदर्शन करेगा। यहां के 31 विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा नेट में उय्तीर्णता हासिल की है। 56 विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की छात्रवृत्ति प्राप्त की है। यहां के अनेक विद्यार्थी अपने शैक्षणिक प्रतिभा एवं मेधा के बल पर बड़ी संख्या में नियुक्त और नियोजन प्राप्त कर रहे हैं। इस साल सूचना प्रौद्योगिकी आधारित पहल के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार से बिहार विश्वविद्यालय सबौर को सम्मानित किया गया है।

सूबे के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार भी जलवायु परिवर्तन से प्रभावित है। 15 जिले बाढ़ और 14 जिले सुखाड़ से प्रभावित हैं। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव फसलों पर भी देखा जा रहा है। छोटे-छोटे जलाशय समाप्त हो रहे हैं। तापमान और वर्षा में अनियमितता देखी जा रही है। नए रोगों और खर पतवार का प्रकाप बढ़ गया है। जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को कम करने के उद्देश्य से नई-नई परियोजनाओं पर विचार किया जा रहा है। बिहार कृषि विवि के शोध कार्यों से किसानों को काफी फायदा हो रहा है। विवि ने अल्प अवधि में फसलों की 25 प्रजातियों का विकास किया है।

ये रहे उपस्थित 

सांसद अजय मंडल, विधायक लक्ष्मी कांत मंडल, नीरज कुमार उर्फ गोपाल मंडल, बीएयू के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आरके सोहाने, डीन एजी डॉ.आरआर सिंह, संजय मिश्रा, पीके सिंह, एसएन सिंह, अरुण सिंह, आयुक्त वंदना किनी, डीएम प्रणव कुमार, डीडीसी सुनील कुमार, एसडीओ आशीष नारायण, एसएसपी आशीष भारती, जिला परिषद अध्यक्ष अनंत प्रसाद उर्फ टुनटुन साह, भाजपा के भागलपुर जिला उपाध्यक्ष संतोष कुमार सहित दर्जनों गणमान्य और अधिकारी उपस्थित थे।

साल में उपजाई जाएंगी तीन-चार फसलें

बिहार कृषि प्रधान राज्य है। यहां की 11 करोड़ आबादी की आय का स्रोत कृषि है। यहां नदियों की भरमार है। मिट्टी उपजाऊ है। भूमिगत जल प्रचुर मात्रा उपलब्ध है। यहां की जलवायु और मौसम को ध्यान में रखकर एक वर्ष में तीन से चार फसलें उपजाई जा सकती है। इसी को ध्यान में रखकर कृषि के विकास के लिए 18 विभागों को मिलाकर कृषि कैबिनेट बनाया गया है।

 

उक्त बाते सूबे के कृषि, पशु मत्स्य एवं संसाधन मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में मंगलवार को कही। उन्होंने कहा कि कृषि विकास को बढ़ावा देकर शहर और गांव के बीच की दूरी को कम करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। स्मार्ट गांव बनाने के लिए भी सरकार प्रयासरत है, ताकि गांव के लोगों को सभी शहरी सुविधाएं उपलब्ध हो सके। किसानों की आय दोगुना करने और प्रत्येक भारतवासी की थाली में बिहार का एक व्यंजन हो को मूर्तरूप देने के लिए राज्य का तीसरा रोडमैप तैयार किया गया है। यह 2022 तक कार्य करेगा। कृषि रोडमैप में 12 विभागों के कार्यक्रम शामिल किए गए हैं। बक्सर से भागलपुर तक गंगा नदी के किनारे जैविक कारिडोर बनाकर जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभी 13 जिले के 21 हजार एकड़ में जैविक खेती हो रहा है। बदलते मौसम के अनुरूप खेती करने के लिए जलवायु लचीला कृषि परियोजना चार कृषि विवि के माध्यम से शुरू की गई है। इसके बिहार कृषि विवि भी है। जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए नई योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

 

निवास राघवन को बेस्ट टीचर का अवार्ड

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के छठे दीक्षा समारोह में चार छात्र-छात्राओं सहित 274 को उपाधि प्रदान किया गया। गोल्ड मेडल ऋषभ कुमार, अनु कुमारी, संजु कुमारी और उषा किरण को प्रदान किया गया। बेस्ट टीचर का अवार्ड श्रीनिवास राघवन को दिया गया। कुलाधिपति फागु चौहान ने गोल्ड मेडल प्रदान किया।

शिक्षा का लक्ष्य सत्य, पवित्रता और सेवा

रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शैक्षणिक एवं शोध संस्थान बेलूर मठ हावड़ा के कुलपति स्वामी आत्मप्रियानंद ने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य सत्य, पवित्रता और समाज की नि:स्वार्थ सेवा होनी चाहिए। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर में मंगलवार को छठे दीक्षा समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति ने छात्र-छात्राओं से कहा कि ईमानदारी से स्वाध्याय करें। अपने ज्ञान को अपडेट रखें। आने वाली पीढ़ी के बीच इसका प्रसार करें। उन्हें सफलता के पांच मूल मंत्र की चर्चा करते हुए कहा कि कभी सत्य से नहीं भटकें, धर्म पर चलें, जीवन भर ज्ञानार्जन करें और मानवता के कल्याण के लिए इसे दूसरों के बीच बांटे। समाज ने आपको बेहतर इंसान बनाया है। समाज का यह ऋण उतारना आपका दायित्व है।

कुलपति ने युवाओं से कहा यह आपके सोने का वक्त नहीं है। सदैव कठिन परिश्रम करें। सफलता का कोई शॉर्टकट फार्मूला नहीं है। आपके ईमानदार प्रयास पर ही देश का भविष्य निर्भर है। उन्होंने कहा कि अभी दो तरह की शिक्षा दी जा रही है। एक शुद्ध विज्ञान और दूसरा प्रायोगिक विज्ञान। आज प्रायोगिक विज्ञान पर आधारित शिक्षा की जरूरत है। छात्र जिस तरह गुरु का आदर करते हैं, ठीक उसी प्रकार गुरु को भी छात्र का आदर करना चाहिए।

बीएयू के दीक्षा समारोह में चाक-चौबंद थी व्यवस्था

बीएयू के दीक्षा समारोह को लेकर सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था थी। बाबूपुर मोड़ से ही पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात थी। बगैर पास के किसी को अंदर जाने नहीं दिया गया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। 

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के छठे दीक्षा समारोह में अतिथियों का स्वागत बीएयू के कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर विवि क्षेत्र के सभी कॉलेजों, बिहार कृषि केंद्र के आलवा विवि के सभी पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित थे। 

जनप्रतिनिधियों को मंच पर नहीं मिली जगह

दीक्षा समारोह में मंच पर जगह नहीं मिलने पर विधायक नीरज कुमार उर्फ गोपाल मंडल बुरा मान गए। उन्होंने कुलपति से अपनी नाराजगी जाहिर की। आयोजन समाप्त होने के बाद उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय ने तरजीह नहीं दी। यह ठीक नहीं है। उधर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि दीक्षा समारोह अन्य समारोहों से अलग है। इसमें ऐसा प्रोटोकॉल ही नहीं है कि जनप्रतिनिधि मंच साझा करेंगे।

बीएयू के दीक्षा समारोह में उपस्थित भागलपुर जिला कृषि पदाधिकारी केके झा।

Posted By: Dilip Shukla

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