भागलपुर, जेएनएन। सृजन घोटाले के मास्टरमाइंड और कलिंगा सेल्स के मालिक एनवी राजू की अलग-अलग तीन संपत्ति को बैंक ऑफ बड़ौदा ने जब्त कर लिया। दंडाधिकारी और पुलिस की निगरानी में बैंक के अधिकारी ने कार्रवाई करते हुए मकान और जमीन को जब्त किया। राजू की 2.20 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई।

बैंक ऑफ बड़ौदा की घंटाघर शाखा ने ऋण नहीं चुकाने पर यह कार्रवाई की है। राजू के पास बैंक का एक करोड़ 55 लाख 85 हजार 366 रुपये मूलधन सहित 1.88 करोड़ बकाया था। बैंक के कानूनी सलाहकार केशव झा ने बताया कि बैंक ने कलिंगा सेल्स के मालिक को बकाया नहीं देने पर डिमांड नोटिस भेजा था, लेकिन नोटिस का कोई जवाब नहीं आने के बाद यह कार्रवाई की गई है। बैंक ने अब ई-नीलामी के माध्यम से जब्त संपत्ति को बेचकर लोन अकाउंट को एडजस्ट करने का निर्णय लिया है।

 

संपत्ति जब्त करने के दौरान दंडाधिकारी गोपाल प्रसाद, बैंक अधिकारी ब्रज किशोर सिंह, रजनीश शेखर, आरआर विभूति, आरके ठाकुर और एसएन महतो उपस्थिति थे।

ये संपत्ति हुई जब्त

-निगम के वार्ड-16 स्थित जोगसर के चंडी प्रसाद लेन में 1440 वर्गफीट की जमीन है। यह जमीन 14 अप्रैल 2005 को उसने खरीद की है।

-डॉ. आरपी रोड में ईश्वरी कांप्लेक्स में ग्राउंड फ्लोर पर 1004 वर्गफीट के अलावा कांप्लेक्स 0.0594 डिसमिल जमीन है। यह जमीन छह जून 2008 को उसने खरीद की है।

-पुलिस लाइन रोड में अध्यान्ती टॉवर के बेसमेंट में 856 वर्गफीट का हिस्सा है। यह बेसमेंट 20 मई 2014 को उसने खरीद की है।

मनोरमा और बैंक के बीच कड़ी

सृजन महिला सहयोग समिति की संस्थापिका मनारेमा देवी को बैंक अफसरों से मिलाने का काम राजू करता था। मनोरमा देवी के घर पर राजू की बैंक अफसरों के साथ बैठकी होती थी। वह सृजन के खाते में सरकारी राशि जमा करने का आदेश देने वाले भागलपुर के एक पूर्व डीएम का भी करीब था। सूबे के कई बड़े अफसरों से भी उसकी नजदीकी होने की बात सामने आई है। कुछ अफसरों के पैसे भी उसके कारोबार में लगे हैं। सृजन घोटाला में सीबीआइ ने एनवी राजू पर चार्जशीट किया है। सीबीआइ द्वारा चार्जशीट करते ही राजू यहां से कारोबार समेटकर फरार हो गया। खलीफाबाग चौक और कचहरी के निकट उसके व्यापारिक प्रतिष्ठान थे। राजू अब अपने गृह जिला भुवनेश्वर में शिफ्ट कर चुका है।

कल्याण विभाग ने कर्मचारी पर कार्रवाई करेगा स्थापना शाखा

जिला कल्याण पदाधिकारी ने जिला स्थापना शाखा के वरीय प्रभारी पदाधिकारी को पत्र भेजकर के जिला कल्याण कार्यालय के पूर्व प्रधान लिपिक कमल किशोर सिन्हा पर आरोप पत्र गठित करने के संबंध में पत्र भेजा है। जिला कल्याण पदाधिकारी ने पत्र में कमल किशोर सिन्हा के आरोपपत्र की चार प्रतियां अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के निदेशक को भेजने का आग्रह किया है।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के निदेशक मिथिलेश कुमार ने जिला कल्याण पदाधिकारी से पूर्व प्रधान लिपिक और लिपिक विजय कुमार पोदर पर कार्रवाई कर रिपोर्ट मांगी है। निदेशक ने जिला कल्याण पदाधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि 23 नवंबर 19 को विजय कुमार पोद्दार के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई (प्रपत्र क गठित) कर विभाग को उपलब्ध कराया गया था, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार वह विहित प्रपत्र में नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग की इस संबंध में निर्गत अधिसूचना के आलोक में आरोप पत्र विहित प्रपत्र में सभी सूचनाएं अंकित करते हुए गठित कर एक सप्ताह के अंदर आरोप पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।

जिला कल्याण विभाग के तीन कर्मियों पर आरोप पत्र गठित कर कार्रवाई के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के निदेशक को भेजा गया था। निदेशक ने सृजन घोटाला के आरोपितों पर विभागीय कार्रवाई के लिए आरोप पत्र गठित करने का निर्देश दिया था, जिन कर्मचारियों के विरुद्ध आरोप पत्र गठित करने को कहा गया था, उनमें पूर्व नाजिर महेश मंडल (दिवंगत), रामप्रवेश पासवान, कमल किशोर सिन्हा, एसएम रिजवान हसन और विजय पोद्दार थे। इन कर्मियों के कार्यकाल में कल्याण कार्यालय की राशि की अवैध निकासी हुई थी।

डीआरडीए के पूर्व लिपिक अरुण कुमार को नोटिस

सृजन घोटाला में डीआरडीए के पूर्व लिपिक अरुण कुमार को अपर समाहर्ता (विभागीय जांच) मनोज कुमार ने नोटिस जारी किया है। नोटिस भेजकर अरुण कुमार को अपना पक्ष भेजने के लिए कहा गया है। अरुण कुमार के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई चलेगी। इसके लिए अपर समाहत्र्ता विभागीय जांच को जांच एवं संचालन पदाधिकारी बनाया गया है। जांच एवं संचालन पदाधिकारी को सहयोग करने के लिए डीआरडीए निदेशक को प्रस्तुतिकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।

डीआरडीए के तत्कालीन लिपिक अरुण कुमार के विरुद्ध सीबीआइ के पुलिस उप महानिरीक्षक व पुलिस उपाधीक्षक के प्रतिवेदन के आलोक में 12 जून 2018 को केस दर्ज किया गया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। अरुण कुमार अभी निलंबित हैं।

डीएम ने पूर्व में अरुण कुमार के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति सीबीआइ को दे दी थी। आपदा प्रबंधन शाखा में कार्यरत लिपिक अरुण कुमार को भी डीएम निलंबित कर चुके हैं। सीबीआइ पूर्व में कई बार अरुण कुमार से पूछताछ कर चुकी है। सृजन घोटाला की जांच सीबीआइ कर रही है।

Posted By: Dilip Shukla

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस