यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
त्रेता युग में स्थापित हुआ था बूढ़ानाथ मंदिर
भागलपुर। भागलपुर जिले में कई ऐसे धार्मिक धरोहर हैं जिनका इतिहास पौराणिक तो है ही लोगों के आस्था का क

भागलपुर। भागलपुर जिले में कई ऐसे धार्मिक धरोहर हैं जिनका इतिहास पौराणिक तो है ही लोगों के आस्था का केंद्र भी है। शहर में अवस्थित बूढ़ानाथ मंदिर धार्मिक धरोहर के रूप में समृद्ध व विश्व विख्यात है। इस मंदिर में अन्य दिनों में भी पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। वहीं महाशिवरात्रि आदि अन्य मौके पर पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का इस मंदिर में लंबा तांता लगता है। धार्मिक व ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले इस धरोहर को विकसित कर पर्यटक स्थल बनाया जा सकता है और वे पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब हो सकता है।
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मंदिर का इतिहास
इस मंदिर की स्थापना त्रेता युग में हुआ था। बक्सर से ताड़का सुर का वध करने के बाद वशिष्ठ मुनी अपने शिष्य राम और लक्ष्मण के साथ भागलपुर आए थे और उसी समय यहां उन्होंने बूढ़ानाथ मंदिर की स्थापना कर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की थी। शिव पुराण के द्वादश अध्याय में भी इसका वर्णन है। इसी मंदिर के नाम से ही मोहल्ले का नाम भी बूढ़ानाथ रखा गया है।
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महाशिरात्रि की तैयारी
सात मार्च को महाशिवरात्रि है। शिवरात्रि की तैयारी में सभी जुट गए हैं। महाशिवरात्रि के मौके पर छह मार्च को बूढ़ानाथ महाआरती सेवा संघ की ओर से गोशाला परिसर से सुबह 7:30 बजे शोभायात्रा निकाला जाएगा। शहर के विभिन्न मार्गो से गुजरते हुए दोपहर तकरीबन दो बजे शोभायात्रा बूढ़ानाथ मंदिर पहुंचेगी। महाशिवरात्रि के मौके पर सात मार्च की सुबह चार बजे से रात आठ बजे तक श्रद्धालु पूजा-अर्चना करेंगे। शाम छह बजे से रात एक बजे तक भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया है। रात आठ बजे श्रृंगार पूजा होगा। रात 10 बजे शिव-पार्वती का विवाह कार्यक्रम होगा। इसी दौरान महा आरती का आयोजन भी किया गया है। इसके बाद रात 12 बजे तक प्रसाद वितरण होगा।
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बक्सर में ताड़का सुर के वध करने के बाद वशिष्ठ मुनी अपने शिष्य भगवान रामचंद्र एवं लक्ष्मण के साथ भागलपुर आए थे। बूढ़ानाथ मंदिर की स्थापना त्रेता युग में वशिष्ठ मुनी और उनके शिष्य रामचंद्रजी एवं लक्ष्मण ने किया था। 50 हजार रुपये से अधिक का फूल-माला चढ़ाया जाता है। शिवरात्रि के संपन्न होने के बाद दूसरे दिन मंदिर के पूछे सूखे नदी-नाला में फूल-माला फेंक दिया जाएगा।
-पंडित ब्रह्मादेव दुबे, बूढ़ानाथ मंदिर के प्रमुख पुजारी
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चूंकि इस बार कई सालों के बाद सोमवार को महाशिवरात्रि है। इसलिए दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ की संभावना है। शिवरात्रि को पांच-छह क्विंटल से दूध शिवलिंग पर चढ़ता है। रंग-बिरंगी रोशनी से मंदिर को सजाया जाएगा। ट्रस्ट इस मंदिर का देखभाल करती है। सदर अनुमंडलाधिकारी इस मंदिर के ट्रस्टी अध्यक्ष हैं।
-पंडित भैरव मिश्र, बूढ़ानाथ मंदिर के पुजारी
