खगडिय़ा, जेएनएन।  नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच बाढ़ की विनाशलीला जारी है। नित्य नए गांव बाढ़ की चपेट में आ रहे हैं।  त्राहिमाम की स्थिति बनती जा रही है। नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र  में विस्थापन का दौर भी जारी है। बाढ़ के साथ-साथ कुछेक जगहों पर कटाव भी जारी है।

नदियों का जलस्तर

बागमती खतरे के निशान से (2.70 मीटर ऊपर बह रही थी। गंगा नदी के जलस्तर में गिरावट आई। यह खतरे के निशान से 0.73 सेमी नीचे बह रही थी। कोसी स्थिर दिखी। कोसी खतरे के निशान से 2.06 मीटर ऊपर थी। जबकि बूढ़ी गंडक के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है। वहीं खगडिय़ा के संतोष स्लूईस के पास बागमती स्थिर रही। परंतु, खतरे के निशान से बहुत ऊपर है। जबकि सोमवार को कोसी के जलस्तर में कमी आई। परंतु, अभी भी वह खगडिय़ा के बलतारा में खतरे के निशान से 2.04 मीटर ऊपर बह रही है। खगडिय़ा अघोरी स्थान के पास बूढ़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि जारी है। यहां बूढ़ी गंडक खतरे के निशान से 0.38 सेमी ऊपर है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। लेकिन खतरे के निशान से 0.64 सेमी नीचे है।

बाढ़ के पानी से घिरते जा रहे हैं गांव

सरकारी स्तर पर जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में 39 पंचायत बाढ़ की चपेट में है। इन पंचायतों के 116 गांव के 85 हजार 660 लोग प्रभावित हैं।  गांव- घरों में पानी प्रवेश के साथ लगातार लोग विस्थापित हो रहे हैं। अब तक तीन हजार से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में प्रशासनिक स्तर पर समुचित नाव का प्रबंध नहीं हो सका है। सरकारी स्तर पर 93 नाव संचालित है। जबकि अलौली के उत्तरी बोहरवा, मझवारी आदि बाढ़ प्रभावित गांव के लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। यहां नाद के नाव के सहारे लोग आवागमन को विवश है। गोगरी प्रखंड के पौरा के साथ बलतारा पंचायत भी बाढ़ के पानी से घिर चुका है। कई गांवों में पानी प्रवेश कर चुका है। पौरा के आधे दर्जन वार्ड पूरी तरह बाढ़ की चपेट में है। सरकारी स्तर पर यहां कोई सुविधा लोगों को नहीं मिली है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का लगातार जायजा लिया जा रहा है। जहां भी आवश्यकता नजर आती है वहां नाव के साथ अन्य राहत कार्य शुरू किया जाता है। बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत के लिए पॉलिथीन सीट, फूड पैकेट वितरण के साथ एक राहत कैंप और सात कम्युनिटी किचन संचालित किए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पेयजल को लेकर सूखे स्थानों पर चापाकल लगाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। - शत्रुंजय मिश्र, एडीएम, खगडिय़ा।

Posted By: Dilip Shukla

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