छौड़ाही, बेगूसराय। सोमवार को इस साल की सबसे प्रचंड धूप पड़ रही है। तापमान 43 डिग्री को पार करने को आतुर है। परंतु, इस शरीर को भेद कर सुखा डालने वाली गर्मी में भी सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर लौटने वाले प्रवासी कामगार बस चलते ही जा रहे हैं। नंगे पैर को जहां तपती कच्ची-पक्की सड़क से फफोले हो गए। बेहाल लोगों की भयानक स्थिति देख रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं। इनकी बेबसी ऐसी कि पेट की आग बुझाएं या भगवान सूर्य द्वारा बरसाए जा रहे आग से बचें। एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति हो गई है।

एसएस 55 बेगूसराय, रोसड़ा एसएच 55 में समस्तीपुर जिले की सीमा इस्मैला जीरोमाइल चेक पोस्ट पर सोमवार को भी भूखे नंगे पैर पैदल घर वापसी कर रहे लोग दिनभर गुजरते रहे। गढ़पुरा जा रहे संतोष कुमार, अलौली जा रहे महेंद्र यादव, चंद्रकला देवी का कहना था कि हम लोग दिल्ली से पैदल आ रहे हैं। 10 दिन पहले चले थे। संतोष के पैर में चप्पल नहीं था वहीं धूप से झुलस कर बदन काला पड़ गया था। बताया कि पेट में एक दाना भी नहीं है। इसी तरह पैदल मंझौल और बखरी की ओर जा रहे राहुल कुमार, महेश कुमार, बॉबी देवी, दीपिका कुमारी, संजीव कुमार आदि भी भयंकर धूप से निढ़ाल होकर पेड़ की छांव में बैठ गए। महिला सिपाही आकांक्षा कुमारी, मधुमती कुमारी, चौकीदार दिलीप पासवान ने चाय बिस्किट पानी पिलाया तब इन लोगों को जान में जान आई। बताया कि 10 दिन से पैदल चल रहे हैं। चेक पोस्ट पर तैनात महिला सिपाही और चौकीदार सड़क से गुजर रहे वाहनों पर असहाय नंगे पैर पैदल घर की ओर जा रहे महिलाओं एवं बच्चों को बैठाकर उनके गंतव्य की ओर रवाना किया।

Posted By: Jagran

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