बिहार के सरकारी स्कूलों में अब नहीं चलेंगे कुड़कुड़े-टकाटक, 50 मीटर के दायरे की दुकानों पर भी रखी जाएगी नजर
सरकारी विद्यालयों में बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कुड़कुड़े, टकाटक जैसे प्लास्टिक-पैक चटपटे खाद्य पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

स्कूलों पैकेज्ड एवं चटपटे खाद्य पदार्थों पर रोक। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
सरकारी स्कूलों में चटपटे खाद्य पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध।
बच्चों को कुड़कुड़े-टकाटक के नुकसान के प्रति जागरूक किया जाएगा।
विद्यालय के 50 मीटर दायरे में बिक्री पर भी नजर।
संवाद सूत्र, वीरपुर (बेगूसराय)। सरकारी विद्यालयों में बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कुड़कुड़े, टकाटक समेत प्लास्टिक पैकिंग में बिकने वाले चटपटे खाद्य पदार्थों के सेवन पर पूर्णत: रोक लगाने का निर्देश दिया गया है।
इस संबंध में प्रभारी बीईओ अभिषेक प्रभाकर ने प्रखंड क्षेत्र के सभी सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं प्रधान शिक्षकों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
जारी निर्देश में कहा गया है कि पिछले दिनों जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में विद्यालयों में बच्चों के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई थी।
जिला पदाधिकारी के निर्देश के आलोक में विद्यालयों में कुड़कुड़े, टकाटक तथा प्लास्टिक पैकिंग में उपलब्ध चटपटे खाद्य पदार्थों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने को कहा गया है।
प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि वे विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों को ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करें और विद्यालय परिसर में इनके उपयोग पर सख्ती से रोक लगाएं।
50 मीटर के दायरे में बिक्री पर भी नजर
निर्देश में विद्यालय के आसपास की दुकानों पर भी नजर रखने को कहा गया है। विद्यालय परिसर से 50 मीटर के दायरे में यदि किसी दुकान पर इस प्रकार के चटपटे खाद्य पदार्थों की खरीद-बिक्री होती है।
बच्चे उसका सेवन करते पाए जाते हैं, तो इसकी लिखित सूचना संबंधित स्थानीय मुखिया एवं वार्ड सदस्य को देने का निर्देश दिया गया है। विद्यालय प्रबंधन को बच्चों के स्वास्थ्य हित में आवश्यक निगरानी रखने को कहा गया है।
परिसर में गंदगी फैलाने पर भी रोक
बीईओ ने विद्यालय परिसर एवं उसके आसपास ऐसे खाद्य पदार्थों के पैकेट या प्लास्टिक कचरा नहीं फैलाने देने का निर्देश दिया है।
प्रधानाध्यापकों को विद्यालय परिसर की नियमित साफ-सफाई एवं स्वच्छता बनाए रखने को कहा गया है। साथ ही बच्चों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और प्लास्टिक कचरे को इधर-उधर नहीं फेंकने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा विभाग के इस निर्देश का उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना तथा चटपटे खाद्य पदार्थों के अत्यधिक सेवन से होने वाली संभावित स्वास्थ्य समस्याओं से उन्हें बचाना है।
