तिल का तेल 200 रुपये लीटर, मखाना-काजू के दाम भी बेकाबू; त्योहार से पहले बिहार में महंगाई का झटका
त्योहारों से पहले बेगूसराय में महंगाई का बड़ा झटका लगा है, जहां तिल का तेल, मखाना और मेवों के दाम ...और पढ़ें

पूजा के तिल के तेल की कीमत बढ़ी
HighLights
तिल का तेल 130 से 200 रुपये प्रति लीटर हुआ।
मखाना 1200 से 1600 रुपये प्रति किलो पहुंचा।
मेवों और पूजा सामग्री के दाम भी बेकाबू हुए।
संवाद सहयोगी, बखरी (बेगूसराय)। त्योहारों के मौसम में महंगाई ने आम जनता की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है। पूजा में इस्तेमाल होने वाला तिल का तेल 50 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। इसके साथ ही बादाम, काजू, मखाना, छुहारा और साबुदाना जैसी पूजा-सामग्रियां और मेवे भी बढ़ती कीमतों के कारण आम लोगों की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं।
पूजा के तिल के तेल की कीमत बढ़ी, गरीब परिवारों का बजट प्रभावित
भारतीय संस्कृति में तिल के दीये जलाने का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ में तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों में विशेष रूप से तिल के दीये जलाए जाते हैं। ऐसे में इसके महंगे होने से इन परिवारों के पूजा बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।
मेवों के बढ़े दाम से पूजा और फलाहार का खर्च बढ़ा
इधर बाजार में मेवों के दाम बेकाबू होने से आम खरीदार दुकानों पर जाने से कतरा रहे हैं। बादाम, काजू और छुहारे जैसे मेवे, जो पूजा-प्रसाद और फलाहार का अहम हिस्सा होते हैं, अब कई परिवारों की पहुंच से बाहर होते दिख रहे हैं।
मखाना 1200 से 1600 रुपये किलो, बादाम भी हुआ महंगा
मखाना की कीमत 1200 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 1600 रुपये हो गई है। बादाम के दाम भी 90 रुपये से बढ़कर 130 रुपये बताए जा रहे हैं। वहीं काजू 800 से बढ़कर 1000 रुपये प्रति किलो और छुहारा 300 से 350 रुपये किलो पहुंच गया है।
दुकानदार बोले-आपूर्ति कम होने और परिवहन खर्च बढ़ने से बढ़े दाम
दुकानदारों के अनुसार पीछे से ही सामान की आपूर्ति कम हो गई है। इसके अलावा परिवहन लागत बढ़ने से थोक मंडियों में कीमतें बढ़ी हैं। इसी वजह से खुदरा बाजार में भी मेवा और पूजा सामग्री महंगी मिल रही है।
त्योहार आते ही दाम बढ़ने पर ग्राहकों ने उठाए सवाल
आम उपभोक्ताओं का मानना है कि त्योहारों के आसपास जरूरी सामान के दाम बढ़ा दिए जाते हैं। कुछ ग्राहकों ने कालाबाजारी और मुनाफाखोरी की आशंका जताते हुए कहा कि सीमित आय में परिवार का खर्च चलाना पहले ही मुश्किल है।
आमदनी स्थिर, खर्च बढ़ा; परिवारों के सामने बढ़ी चुनौती
महंगाई का सबसे बड़ा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। एक तरफ जरूरी सामान की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, वहीं आमदनी स्थिर है। ऐसे में परिवारों के सामने बच्चों की जरूरतों और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
तिल का तेल 130 से 200 रुपये लीटर, मखाना 1600 रुपये किलो
बाजार में प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तिल का तेल 130 से बढ़कर 200 रुपये प्रति लीटर, मखाना 1200 से 1600 रुपये प्रति किलो और बादाम 90 से 130 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है।
काजू 800 से 1000, छुहारा 300 से 350; साबुदाना भी महंगा
काजू की कीमत 800 से बढ़कर 1000 रुपये प्रति किलो हो गई है। छुहारा 300 से बढ़कर 350 रुपये और साबुदाना 72 से बढ़कर 85 रुपये तक पहुंच गया है। त्योहारों से पहले इन बढ़ी कीमतों ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
पूजा की थाली से मेवे तक महंगाई का असर
तिल का तेल, मखाना, बादाम, काजू और साबुदाना जैसी वस्तुओं के दाम बढ़ने से पूजा और फलाहार का खर्च बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि त्योहार खुशियों का समय है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें इन खुशियों के बजट पर भारी पड़ रही हैं।
