मिथिलांचल का 'मिनी छठ': 14 सितंबर को मनेगा चौठ चंद्र, अपनों के साथ चंद्रदेव को अर्घ्य देंगे श्रद्धालु
मिथिलांचल में लोक आस्था और पारिवारिक मिलन का पर्व चौठ चंद्र 14 सितंबर को मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां बेगूसराय समेत पूरे क्षेत्र में शुरू हो गई हैं।

मिथिलांचल में चौठ चंद्र पर्व: आस्था, मिलन और मिनी छठ का उत्सव (AI Generated Image)
HighLights
चौठ चंद्र पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा, तैयारियां शुरू।
चंद्रदेव को अर्घ्य देने की परंपरा, मिनी छठ भी कहते।
पारिवारिक मिलन का पर्व, स्वजन घर लौट रहे हैं।
जागरण संवाददाता, बेगूसराय। चांद निकलने का इंतजार, हाथों में पूजा की सजी थाली और परिवार के साथ चंद्रदेव को अर्घ्य...। मिथिलांचल में चौठ चंद्र पर्व की यही खास तस्वीर देखने को मिलती है। लोक आस्था और पारिवारिक मिलन का यह पर्व 14 सितंबर सोमवार को मनाया जाएगा।
इस पर्व को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। रविवार को व्रती नहाय-खाय करेंगे। रोजगार और नौकरी के सिलसिले में दूसरे प्रदेशों में रहने वाले स्वजन भी पर्व में शामिल होने के लिए घर लौटने लगे हैं। इससे गांव-घर का माहौल अभी से उत्सवी होने लगा है।
पंडित राघवेंद्र झा उर्फ हीरा झा एवं पंडित संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि मिथिलांचल के प्रमुख पर्वों में शामिल चौठ चंद्र को ''मिनी छठ'' भी कहा जाता है। हालांकि दोनों पर्वों में अर्घ्य देने की परंपरा अलग है।
छठ पर्व में भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है, जबकि चौठ चंद्र के दिन चंद्रदेव की पूजा कर उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा है।
श्रद्धालु विशेष रूप से पूजा की थाली अथवा सुपती सजाते हैं। इसमें खीर-पूरी, फल, मिष्टान्न, मिट्टी के बर्तन में दही सहित विभिन्न प्रकार के पकवान रखे जाते हैं। चंद्रमा के उदय के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अर्घ्य अर्पित किया जाता है।
घर-परिवार के मिलन का भी पर्व:
चौठ चंद्र की सबसे खास बात इसकी पारिवारिक और सामाजिक परंपरा है। इस पर्व पर दूर प्रदेशों में रहने वाले बेटे-बेटियां, भाई-बंधु और अन्य स्वजन घर पहुंचते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा में शामिल होते हैं। इससे पर्व धार्मिक आस्था के साथ रिश्तों की मिठास और पारिवारिक जुड़ाव का भी संदेश देता है।
पर्व को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ने की उम्मीद है। फल, मिठाई, पूजा सामग्री और अन्य आवश्यक सामान की खरीदारी को लेकर लोग बाजारों का रुख करेंगे। घरों में खीर, पूरी और अन्य पारंपरिक पकवान तैयार किए जाएंगे।
गणेश पूजन और मेले से बढ़ेगी रौनक:
चौठ चंद्र के अवसर पर कई स्थानों पर गणेश चतुर्थी पूजनोत्सव की शुरुआत भी होती है। वहीं कुछ जगहों पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ मेले में सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती हैं।
इस प्रकार चौठ चंद्र मिथिलांचल की लोक आस्था, परंपरा, पारिवारिक मिलन और सामुदायिक उत्सव का सुंदर संगम बनकर सामने आता है।
