भागलपुर [दिलीप कुमार शुक्ला]। लोकसभा चुनाव में बिहार के हर संसदीय क्षेत्र से राजग और महागठबंधन के बीच ही मुख्य मुकाबला होता दिख रहा है। लेकिन बांका लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी पुतुल कुमारी के चुनाव मैदान में आ जाने से यहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। यहां से महागठबंधन ने राजद प्रत्याशी सांसद जयप्रकाश नारायण यादव को टिकट दिया है। जबकि राजग ने जदयू प्रत्याशी विधायक गिरिधारी यादव को अपना उम्मीदवार बनाया। सीट शेयरिंग में भाजपा से बेटिकट हुई पुतुल कुमारी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल कर दिया। वह भाजपा की ओर से प्रबल दावेदार थीं। लेकिन यह सीट जदयू के कोटे में चली गई। बांका लोकसभा सीट पुतुल कुमारी के पति पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत दिग्विजय सिंह का क्षेत्र रहा था। जहां उन्होंने बांका में रेल यात्रा सुलभ बनाने, मंदार का उत्थान सहित कई विकास कार्यो को अंजाम दिया था।

बहरहाल जदयू के गिरिधारी यादव और निर्दलीय पुतुल कुमारी दोनों नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। गिरिधारी तो एनडीए में हैं ही, इसलिए उनका नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट मांगना लाजिमी है। लेकिन पुतुल कुमारी का कहना है कि मेरा समर्थन नरेन्द्र मोदी के साथ है। उन्होंने कहा भारत को प्रधानमंत्री के रूप में अभी और नरेन्द्र मोदी की आवश्यकता है। उनके विकास कार्यों को बांका में धरातल पर उतारने के लिए मैंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरा है। हालांकि भाजपा ने उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। वह भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष थीं। इसके बावजूद हर चुनावी सभा में वे नरेन्द्र मोदी की तारीफ करने के लिए खुद के लिए वोट मांग रही हैं। उनके चुनाव प्रचार की कमान उनकी बेटी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी श्रेयसी सिंह संभाल रहीं हैं। पुतुल कुमारी ने कहा कि हमारे साथ बांका लोकसभा क्षेत्र की जनता है। पिछले 9 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हूं। बांका के विकास के लिए हमेशा जनता से साथ रही हूं। उन्होंने कहा भाजपा और नरेन्द्र मोदी देश की जरूरत है।

दिग्विजय सिंह के भाजपा से थे बेहतर संबंध

पुतुल देवी के पति स्व. दिग्विजय सिंह का भाजपा से बेहतर संबंध रहा था। भाजपा के कई बड़े नेताओं से उनके अच्छे रिश्ते थे। दूसरी पार्टियों में रहने के बावजूद भी दिग्विजय सिंह का भाजपा में अच्छी पकड़ थी। वे अटल बिहारी वाजपेयी की नेतृत्‍व वाली केन्द्र की राजग सरकार में विदेश एवं रेल राज्य मंत्री भी रहे थे। उन्होंने बांका लोकसभा का तीन बार प्रतिनिधित्व किया था। 2009 में जब जदयू ने उन्हें बांका से टिकट नहीं दिया तो वे नगाड़ा लेकर निर्दलीय मैदान में कूद पड़े। और उन्होंने चुनाव भी जीता। हालांकि इसके कुछ दिन बाद ही उनका निधन हो गया। पुन: 2010 में बांका में हुए लोकसभा उपचुनाव में उनकी पत्नी निर्दलीय पुतुल कुमारी जीतीं।

पुतुल के लिए प्रचार करने आए थे आडवाणी

2014 में भाजपा के टिकट पर पुतुल वहां से उम्मीदवार बनीं। पुतुल का चुनाव प्रचार करने लाल कृष्ण आडवाणी भी आए थे। हालांकि इस चुनाव में मामूली अंतर से वे राजद के जयप्रकाश नारायण यादव से हार गईं। लेकिन उन्होंने भाजपा से कभी नाता नहीं तोड़ा। वे आरएसएस के भी काफी करीब रहीं। इस बार निर्दलीय चुनाव लडऩे पर भाजपा को अपना स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने लिखा है कि भाजपा और केन्द्र सरकार की नीतियों को मेरे अलावा कोई पूरा नहीं सकता। राजग में बेहतर उम्मीदवार नहीं होने के कारण मुझे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन करना पड़ा है। उन्होंने गिरिधारी यादव पर अवसरवादी का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए वे अक्सर पार्टी बदलते रहते हैं। इधर, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक चुनावी सभा में कहा कि गिरिधारी यादव इस चुनाव में सिर्फ वोट काटने वाले प्रत्याशी के रूप में रहेंगे।

आरएसएस ऑफिस का गिरिधारी यादव ने की परिक्रमा

जदयू प्रत्याशी गिरिधारी यादव 30 वर्ष के राजनीतिक कैरियर में पहली बार बांका के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय पहुंचे। एक कार्यक्रम में पहुंचे आरएसएस के प्रांत प्रचारक राणा प्रताप से उन्होंने मिलने का प्रयास किया। कई घंटे तक बैठे रहे। हालांकि गिरिधारी यादव का कभी आरएसएस से नाता नहीं रहा है। उनका संबंध जनता दल, राजद, कांग्रेस, जदयू आदि पार्टियों से रहा है। हालांकि एक बार तो जब कोई पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय मैदान में उतर गए थे। इस कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनका कोई नाता नहीं रहा। इस चुनाव में जब वे जदयू उम्मीदवार हैं और भाजपा राजग का प्रमुख दल है तो वे आरएसएस ऑफिस परिक्रमा करने पहुंच गए। अब देखना है कि बांका की जनता किन्‍हें विजयश्री दिलाती है।

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