बांका [रवि वर्मा]। बिहार में एक स्‍टेशन ऐसा भी है, जहां रेलगाडि़यां लाल सिग्‍नल पर दौड़ती हैं। चौंकिए नहीं, मामला जरा टेक्निकल है। इसे लेकर रेल प्रशासन के अपने तर्क हैं। लेकिन, इस लापरवाही के कारण रोजाना हजारों यात्रियों की जान खतरे में पड़ती है। मामला बांका-देवघर रेलखंड पर ट्रेनों के परिचालन का है।

बिहार-झारखंड के बांका-देवघर रेलखंड पर ट्रेन परिचालन शुरू हुए डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुके हैं। लेकिन, इस रूट पर डिजिटल सिग्‍नल की व्‍यवस्‍था ठीक नहीं की जा सकी है। रूट पर स्थायी तौर पर रेड लाइट जल रही है। इसके बावजूद रूट पर ट्रेनों का नियमित परिचालन हो रहा है।

पेपर लाइन क्लियर पर ट्रेनों का परिचालन

एक रेल कर्मचारी ने गोपनीयता के आग्रह के साथ बताया कि डेढ़ वर्ष पूर्व इस रेलखंड पर परिचालन शुरू हुआ था। उसके बाद से ही यहां के सभी डिजिटल सिग्नल खराब हैं। उसके अनुसार रेल हादसों पर रोक लगाने के लिए बांका रेलवे स्टेशन पर यूनिवर्सल फेल सेफ ब्लॉक इंटर फेल मशीन लगाई गई है, लेकिन इसे चलाने वाली बीपीएस मशीन खराब है। इस कारण बांका-देवघर रेलखंड के डिजिटल सिग्नल काम नहीं कर रहे। इनमें केवल रेड लाइट्स ही जल रही हैं। अभी बांका जंक्शन पर पेपर लाइन क्लियर (पीएलसी) पर परिचालन कराया जा रहा है।

जानिए, क्‍या है समस्‍या का कारण

बांका जंक्शन मालदा व आसनसोल डिवीजन की सीमा है। यहां से होकर डीएमयू बंगाल के अंडाल जंक्शन तक जाती है। बावजूद इसके, बांका जंक्शन पर सुरक्षा व संसाधनों की कमी है। रेलखंड पर ट्रेन परिचालन शुरू होने के डेढ़ साल बाद भी कंस्ट्रक्शन विभाग ने इसे ओपन लाइन इंजीनियरिंग के हवाले नहीं किया है। इस कारण डिजिटल सिग्नल ट्रेन गुजरने के दौरान भी हरा नहीं होता है।

आसनसोल डिवीजन के डीआरएम पीके मिश्रा ने इस मामले को गंभीरता से लेने का आश्‍वासन दिया। उन्‍होंने माना कि ट्रेन परिचालन शुरू होने के दो माह बाद ही रेलवे कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट को इसे ओएलइ के हवाले करना होता है। लेकिन, यहा अभी तक ऐसा नहीं हो सका है।

रोजाना खतरे में पड़ती डेढ़ हजार यात्रियों की जान

लेकिन, रेल कर्मी इस प्रक्रिया को फूलप्रूफ नहीं मानते। इस कारण कभी कोई हादसा हो सकता है। रेलखंड पर बांका से अंडाल तक एक जोड़ी डीएमयू (डीजल मल्‍टीपल यूनिट) ट्रेनें चलती हैं। इनमें रोजाना करीब डेढ़ हजार लोग यात्रा करते हैं। ऐसे में राेजाना इतने यात्रियों की जान खतरे में रहती है।

Posted By: Amit Alok

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