बांका। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से पंजवारा की यादें तीन दशक से अधिक समय से जुड़ी हुई है। 1990 में राम रथ यात्रा पर सवार होकर गोड्डा के रास्ते भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी पंजवारा पहुंचे थे। तब चैती दुर्गा पूजा महोत्सव चल रहा था।

अष्टमी तिथि के दिन उनके पंजवारा होकर गुजरने की घोषणा से लोगों की भावनाएं उफान पर थी। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पंजवारा संकट मोचन सह चैती दुर्गा मंदिर परिसर के बाहर मुख्य पथ पर रथ के स्वागत के लिए खड़ी थी। सड़क जाम की स्थिति बन पड़ी थी। रथ आने की सूचना पर स्थल पर जय श्रीराम का जयघोष गूंजने लगा। रथ पर सवार लालकृष्ण आडवाणी ने भीड़ का नजारा देख लोगों के आह्वान पर रथ रोकने का आदेश दिया। रथ रुकने के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं के आग्रह पर वे रथ से उतरे। लोगों का हाथ जोड़ अभिवादन स्वीकार किया। मंदिर पहुंच मां दूर्गा की प्रतिमा का दर्शन कर राम मंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया। मंदिर के पुजारी लाल बाबा को झुककर प्रणाम किया। पुजारी ने आडवाणी का तिलक लगा उन्हें आशीर्वचन दिया। आडवाणी ने पुजारी को दक्षिणा में अपने जेब से निकाल एक सौ एक रुपये दिया। लोगों के आह्वान पर उन्होंने भीड़ को संबोधित कर तब राम मंदिर निर्माण को देशवासियों की आकांक्षा कहा था। कहा था कि राम हमारे जननायक हैं। उनका मंदिर बनना देशवासियों का सपना साकार होने के समान है। यहां भाजपा कार्यकर्ता महेश मंडल, अमरकांत जायसवाल, पुजारी लाल बाबा आदि ने बताया कि आज भी वो घड़ी जेहन में कैद है। तीस वर्षों के बाद आज अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण का भूमिपूजन होना अद्भूत गौरव का क्षण है।

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