बांका। वाकई गुरूवार को लगा की सावन का महीना आया हुआ है। सुबह की किरण निकलने के पहले झमाझम बारिश हो रही थी। आसमान दिन भर बादलों से भरा रहा तथा रिमझिम फुहार उड़ती रही। बरसात के पानी में नाचते गाते झूमते पथ पर दिन भर कांवरिया आगे बढ़ते दिखे। वैसे इस सावन लगभग कांवरियों को तेज गर्मी व चिलचिलाती धूप का ही शिकार होना पड़ा था। लेकिन बुधवार की रात से शुरू हुई बरसात ने कांवरियों को जमकर राहत दी है। जिस कारण गुरूवार कांवरियों को मार्ग मे नाचते गाते और झूमते हुये गुजरते देखा गया।

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कांवरिया पथ पर धड़ल्ले से बिक रहा नशीला पदार्थ

संसू, बेलहर: प्रशासन चाहे लाख दावा कर ले लेकिन, कांवरिया मार्ग में बालश्रम, रसोई गैस का उपयोग, नशीले पदार्थ की बिक्री बंद नहीं हुई। यह कार्य कहीं चोरी छिपे नहीं बल्कि प्रशासनिक महकमे के नजरों के सामने ही हो रही है। इसके बाद भी प्रशासन इस पर अंकुश लगाने में विफल साबित हो रही है। वहीं स्कूली छात्रों को भी कई जगह पैर मालिस करने की मशीन को हाथ में लिए कांवरियों के पास गिड़गिड़ाते या मालिस करते देखा जा सकता है। इतना ही नहीं कई विदेशी कांवरिया ऐसी फटेहाल स्थिति में मौजूद बच्चों की तस्वीर उतारकर साथ ले जाते हैं। लाख प्रयास के बाद भी यह रूक नहीं रहा है। जिससे बांका जैसे जगह की देश विदेश में निश्चित रूप से छवि बिगड़ रही है। प्रशासन से अभिभावक तक इसको नजर अंदाज किये हुए हैं।

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पथ पर बिक रही लाल खेत की फसल

संसू, बेलहर: कांवरिया मार्ग में बिक रहा अधिकांश खीरा और भुट्टा अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बेलहर, सुईया एवं फुल्लीडुमर थाना क्षेत्र के गांवों से उपलब्ध हो रहा है। जिसे देश-विदेश से आये कांवरिया श्रद्धालु बड़े चाव से खा रहे हैं। जानकारी के अनुसार सुईया एवं फुल्लीडुमर थाना क्षेत्र के अकैया, बरमसिया, मलटंड़िया, दुबराज, सबैजोर, बेलहर के महेशा, बगधसवा, खसिया, बेला, उल्ही आदि गांव के लोग हर रोज बाइक एवं साइकिल से खीरा एवं भुट्टा की खेप लेकर पहुंच जाते हैं। मार्ग स्थित दुकानदार को थौक के भाव में देकर चले जाते हैं।

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