बांका। प्रखंड मुख्यालय से महज सवा सौ गज की दूरी पर अवस्थित है शिव तालाब। यह तालाब कभी क्षेत्र का धरोहर था। लेकिन अब इस तालाब का अस्तित्व खतरे में है। आज से दो दशक पूर्व की बात करें तो तालाब किसी पर्यटन स्थल से कम नहीं था। दूर दूर से लोग तालाब में स्नान करने आते और बाबा भोलेनाथ का पूजा-अर्चना कर घंटों आराम करते थे। शिवरात्री के समय में एक सप्ताह पूर्व से लेकर बाद तक मेला लगता था। तालाब के पानी का उपयोग लोग भोजन पकाने तक के लिए करते थे। वहीं तालाब से आसपास की सैकड़ों एकड़ खेत की ¨सचाई हो रही थी। लेकिन इसकी अनदेखी की वजह से तालाब का पानी दूषित होते चला गया। प्रशासनिक अनदेखी का आलम यह है कि स्थानीय लोग अब तालाब का अतिक्रमण करने में जुट गए हैं। मौजूदा समय में शिव तालाब बाजार वासियों के लिए कूड़ा डं¨पग जोन बन कर रह गया है। करीब पांच एकड़ में फैला यह तालाब सिमट कर तीन एकड़ में रह गया है। तालाब का अस्तित्व मिट जाने की वजह से समीप का जलस्तर भी नीचे चला गया है। जिसका परिणाम है कि गर्मी आते ही दर्जनों नलकूप व चापानल फेल हो जाते हैं। लोग बूंद बूंद पानी के लिए तरस जाते हैं। पंचायत की मुखिया सुषमा भारती, राजेश निराला, उत्तम पांडेय, विभूति प्रसाद ¨सह आदि ने कहा कि तालाब के जीर्णोद्धार के लिए कई बार प्रशासन से लेकर राजनेताओं का ध्यान आकृष्ट कराया गया है। मुखिया ने बताया कि इसके कायाकल्प के लिए वे प्रयासरत हैं।

Posted By: Jagran

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