बांका। कोरोना की दूसरी लहर में इस साल मौत के शिकार बने लोगों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा मिलना है। अप्रैल-मई में लहर के दौरान मौत के शिकार बने आश्रितों को मई से ही इसका भुगतान भी शुरू हो गया है। जिला में 70 लाभुकों को जांच के बाद चार-चार के हिसाब से दो करोड़ 80 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है, लेकिन 44 लाभुक अप्रैल और मई से ही कार्यालय का चक्कर लगाकर थक चुके हैं। उन्हें अबतक मुआवजा हाथ नहीं लग सका है। ऐसे में मृतक के आश्रितों को कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इनका मुआवजा विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों को लेकर रुका हुआ है। वैसे, जिला आपदा शाखा ने मौत के शिकार बने 114 आश्रितों के आवेदन के आलोक में इसका आवंटन राज्य सरकार से प्राप्त कर लिया है। संबंधित कागजात बनकर जमा होने के बाद ही उनके भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

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दूसरे प्रदेश में मौत बनी बाधा

जिला आपदा शाखा में मुआवजा के लिए प्राप्त 114 आवेदनों में 44 को इसकी राशि का इंतजार है। भुगतान का लंबित अधिकांश मामला दूसरे प्रदेश में मौत से संबंधित है। दूसरे प्रदेश में मौत के कारण उनका कागजात सत्यापित नहीं हो पा रहा है। नतीजा, राशि भुगतान में पेंच फंसा हुआ है। आवेदन के मुताबिक कुछ आश्रित दूसरे प्रदेश के रहने वाले हैं और उनकी मौत बांका में हो गई। ऐसे में उनका मुआवजा रुका हुआ है। जबकि बांका के कुछ आश्रितों के मरीज की मौत बिहार राज्य से बाहर किसी प्रदेश में हो गया है। इसके अलावा भी कुछ लाभुक का भुगतान सही जगह से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं होने से रुका है।

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कोट

कोरोना मौत में आश्रित को मई से ही जिला में मुआवजा दिया जा रहा है। हाल में भी 33 लाभुक को चार-चार लाख रुपये दिया गया है। लंबित आवेदन में किसी ना किसी कागजात की कमी है। इस कारण उनका भुगतान नहीं हो सका है। इसका निराकरण होते ही भुगतान कर दिया जाएगा।

माधव प्रसाद सिंह, अपर समाहर्ता सह वरीय प्रभारी पदाधिकारी, आपदा

Edited By: Jagran