बांका। नरीपा गांव में डायरिया से एक की मौत और आधा दर्जन के आक्रांत होने की खबर पर स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम डॉ. संजय कुमार के साथ गांव पहुंचकर डायरिया ग्रसित मरीजों की जांच बुधवार को की है। इसके साथ ही दवाई देते हुए बीमारी से बचने के लिए शुद्ध भोजन, शुद्ध पेयजल और साफ-सुथरे माहौल में रहने के लिए कहा है।

दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने पर विभाग सजग हो गया है। ग्रामीण महामारी फैलने की मुख्य वजह दूषित जल पीना बताया है। गांव के वार्ड नंबर एक में आधे अधूरे नल जल योजना के कारण ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण से उक्त गांव में डायरिया महामारी ने गांव में बड़ा रूप ले लिया है। डायरिया की चपेट में देवी लाल सिंह, रघुनंदन सिंह, सुभद्रा देवी, सहित कई दर्जन लोगों ने बताया गांव में नल जल योजना का काम अधूरा कर छोड़ दिया है। जिसके कारण शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है। डायरिया से ग्रसित रहने के बावजूद भी हम लोगों को हैंड पंप और कुएं का पानी अभी भी पीना पड़ रहा है।

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संवेदक पर कार्रवाई की मांग

गांव के सिकंदर शर्मा, चंदन कुमार, बृजभूषण सिंह, पुष्पा देवी, प्रियंका कुमारी, नंद गोपाल सिंह सहित तीन दर्जन लोगों ने बताया कि गांव में आज नल जल योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। यहां तक कि गंदगी के बाद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लीचिग पाउडर का छिड़काव तक नहीं करवाया गया है। सिर्फ दवाई देकर चले गए, जबकि पूरे गांव में महामारी का प्रकोप फैल चुका है। ग्रामीणों ने बताया पीएचईडी विभाग द्वारा नल जल का आधा अधूरा काम रहने के बाद भी भीषण डायरिया हो जाने पर भी सुध नहीं लिया है। ग्रामीणों ने आधा अधूरा छोड़कर भागे संवेदक के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग जिला प्रशासन से की है।

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