बांका। 11 साल बाद भी सदर अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा बहाल नहीं हो सकी है। इस कारण प्राइवेट स्तर पर मरीजों का आर्थिक शोषण हो रहा है, जबकि कई मशीनें आकर अस्पताल में धूल फांक रही है।

बहरहाल यहां पर कई सुविधा नहीं होने के कारण ज्यादातर रोगियों को रेफर कर दिया जाता है। कई विशेषज्ञ चिकित्सक का भी यहां पर घोर अभाव है। वैसे, कम साधनों के बाद भी कोरोना काल में मरीजों की सेवा में लगा हुआ है। वैसे, चिकित्सकों के अभाव में कई मरीजों को चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती है।

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केस स्टडी- एक

बांका के सन्हौला निवासी दीपक यादव ने बताया कि सदर अस्पताल में बेड तो मिल जा रहा है, लेकिन यहां पर चिकित्सक की कमी के कारण परेशानी हो रही है। कई दिनों से न्यूरो के लिए घूम रहा हूं। अब जाकर पता चला है यहां पर इसके चिकित्सक ही तैनात नहीं है।

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केस स्टडी- दो

पिपरा गांव के दीनदयाल ने बताया कि यहां पर आकर कोई फायदा नहीं है। सिर्फ स्लाइन देकर तंदुरुस्त नहीं किया जा सकता है। यहां पर उसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन की ओर से अच्छी सेवा देने का प्रयास किया जा रहा है।

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अस्पताल में मरीज को नहीं हो रही परेशानी

बांका सदर अस्पताल में प्रबंधक अमरेश कुमार की ओर से कम संसाधन में भी बेहतर सुविधा देने काम जारी है। यहां पर फिलहाल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। यहां पर साठ बड़ा और 50 छोटा ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध है। जिससे मरीज को दिया जाता है। सदर अस्पताल में पीएम केयर फंड की ओर से चार वेंटीलेटर दी गई है, लेकिन टेक्नीशियन के अभाव में यह चालू नहीं हो पाया है। बात अगर एंबुलेंस की हो तो यहां पर पांच एंबुलेंस उपलब्ध है। साथ ही एक शव वाहन भी है।

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औसतन 110 मरीज हो रहे रेफर

अस्पताल में विषम परिस्थिति को देखते हुए मरीजों को रेफर किया जाता है। यहां पर प्रत्येक माह औसतन 110 मरीज को रेफर कर दिया जाता है। कई स्पेशलिस्ट की कमी इसकी बड़ी समस्या है।

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कोट

कम संसाधन में यहां पर बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। कोशिश रहती है कि मरीज रेफर ना हो। लेकिन मरीज की स्थिति को देखते हुए उच्च संस्थान को रेफर किया जाता है।

अमरेश कुमार, सदर अस्पताल प्रबंधक