बांका। नवगठित नगर परिषद में कुर्सी खरीद मामले में गड़बड़ी की शिकायत मिल रही है। नियमों को ताक पर रखकर कुर्सी खरीद सहित कई कार्य किए गए हैं। चर्चा है कि घटिया कुर्सी खरीदने के कारण पहली बार बैठने पर ही दो दर्जन कुर्सियां टूट गई है। एक नप कर्मी ने बताया कि ऑडनरी कुर्सी में कंपनी का स्टीकर साटकर राशि का बंदर बांट किया गया है। जबकि कई कार्य बिना निविदा ही हुआ है। मुख्य पार्षद एवं उपमुख्य पार्षद सहित 26 वार्ड पार्षदों के लिए लिए गए वीआइपी कुर्सी बिना निविदा की भागलपुर से खरीद की गई है। इसमें से कई कुर्सी का हैंडल गायब है। जानकारी के अनुसार नगर परिषद में मी¨टग हॉल के लिए 600 प्लास्टिक की कुर्सी खरीदी गई है। इधर, नगर परिषद सूत्रों ने बताया कि कुर्सी खरीद के लिए 20 फरवरी 2017 को निविदा निकाली गई थी। जबकि इसमें तीन एजेंसी शामिल हुई थी। केएसीईएस एनजीओ का वित्तीय बीट खुलने पर 483 रुपये की दर से 600 कुर्सी की खरीद हुई है। जबकि हैंड ट्रॉली और मिनी ट्रीपर गाड़ी रहने के बाद भी कमीशनखोरी के कारण अतिरिक्त खरीद की गई है। नप सूत्रों ने बताया कि घटिया किस्म की कुर्सी पर हीरो नेशनल का स्टीकर लगाकर राशि की बंदर बांट की गई है। इसमें नगर परिषद के कुछ कर्मियों के अलावा एनजीओ संचालक की भूमिका संदिग्ध है। इस बाबत एनजीओ संचालक मृत्युंजय मिश्रा से पूछे जाने पर बताया कि उन्होंने कुर्सी खरीद नहीं की है। उनका सिर्फ एनजीओ के कागजात का इस्तेमाल किया गया है। इधर, सिटी मैनेजर ने बताया कि निविदा के बाद ही वीआइपी कुर्सी की खरीद की गई है। वे अभी दिल्ली में हैं। डिटेल बड़ा बाबू ही बता सकते हैं।

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कोट

आइएसओ मार्का की कुर्सी खरीद की गई है। इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है।

बीके तरूण, कार्यपालक पदाधिकारी नप बांका

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कोट

घटिया कुर्सी की खरीद की गई है। इसकी जांच की जाएगी। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अनिल कुमार ¨सह, उपमुख्य पार्षद, नप बांका

Posted By: Jagran

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