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पानी में नहीं डूबेगी मत्स्य पालकों की कमाई! ब‍िहार में तालाबों व बायोफ्लॉक का होगा बीमा, मछलियों को मिला सुरक्षा कवच

Published: Thu, 10 Sep 2026 11:53 PM (IST)

PM Matsya Kisan Samriddhi Yojana Bihar : प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि-सह-योजना के तहत बांका जिले में मत्स्य पालकों के लिए ...और पढ़ें

PM Matsya Kisan Samriddhi Yojana Bihar : बांका में तालाबों और बायोफ्लॉक का होगा जल कृषि बीमा, मछलियों की खड़ी फसल को मिलेगा सुरक्षा कवच

PM Matsya Kisan Samriddhi Yojana Bihar : बांका में तालाबों और बायोफ्लॉक का होगा जल कृषि बीमा, मछलियों की खड़ी फसल को मिलेगा सुरक्षा कवच

HighLights

  1. बांका में पीएम मत्स्य किसान समृद्धि योजना के तहत जल कृषि बीमा।

  2. पारंपरिक तालाबों, बायोफ्लॉक और आरएएस इकाइयों को मिलेगा बीमा कवच।

  3. मछलियों की खड़ी फसल और बीज को जोखिमों से मिलेगी सुरक्षा।

संवाद सूत्र, बांका। PM Matsya Kisan Samriddhi Yojana Bihar :मत्स्य पालन व्यवसाय में लगी किसानों की खून-पसीने की कमाई और पूंजी अब किसी प्राकृतिक आपदा, अप्रत्याशित बीमारी या अन्य जोखिमों की भेंट नहीं चढ़ेगी। बांका जिले के मत्स्य पालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और उनके व्यवसाय को सुरक्षित व टिकाऊ बनाने के लिए सरकार ने जल कृषि बीमा का मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि-सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत अब पारंपरिक तालाबों और पोखरों के साथ-साथ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से संचालित इकाइयों को भी सीधे बीमा सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है।

  • प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि-सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत बांका में शुरू हुई जल कृषि बीमा योजना

  • पारंपरिक तालाबों के साथ आधुनिक बायोफ्लॉक और आरएएस (रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम) इकाइयों को भी मिलेगा बीमा कवच

  • पानी में मौजूद मछलियों की खड़ी फसल और मत्स्य बीज के नुकसान पर मिलेगा मुआवजा, मत्स्य निदेशालय ने 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

  • प्रीमियम और तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एनएफडीबी के क्षेत्रीय बीमा विशेषज्ञ करेंगे जिला स्तर पर सहयोग

योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बायोफ्लॉक और आरएएस (रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम) जैसी उन्नत तकनीकों से मछली पालन कर रहे प्रगतिशील किसानों को भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा, पानी के भीतर मौजूद मछलियों की खड़ी फसल और मत्स्य बीज को भी बीमा कवर में शामिल किए जाने का स्पष्ट प्रावधान है। इससे अप्रत्याशित मौसम, पानी के प्रदूषण या किसी महामारी के चलते होने वाले भारी नुकसान से किसान पूरी तरह सुरक्षित रह सकेंगे और उनका निवेश नहीं डूबेगा।

एक सप्ताह में तलब की गई प्रगति रिपोर्ट, लगेंगे शिविर

जिले में मत्स्य पालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हजारों किसानों व परंपरागत मछुआरों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए मत्स्य निदेशालय ने मैदानी स्तर पर तेजी से काम करने के निर्देश जारी किए हैं। जिला मत्स्य कार्यालय को स्पष्ट आदेश दिया गया है कि वह विशेष जागरूकता शिविरों और कार्यशालाओं का आयोजन कर अधिक से अधिक मत्स्य पालकों का निबंधन जल कृषि बीमा पोर्टल पर कराए।

निदेशालय ने जिले से योजना की वर्तमान प्रगति को लेकर विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है, जिससे यह साफ हो सके कि अब तक कितने किसानों को योजना से जोड़ा गया है और आगामी समय में कितनों को बीमा सुरक्षा देने की रूपरेखा है।

एनएफडीबी के विशेषज्ञ दूर करेंगे तकनीकी अड़चनें

बीमा प्रक्रिया के दौरान मत्स्य पालकों को प्रीमियम निर्धारण, दस्तावेज तैयार करने या अन्य किसी तकनीकी अड़चन का सामना न करना पड़े, इसके लिए विभाग ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। यदि पोर्टल संचालन या प्रीमियम भुगतान में कोई समस्या आती है, तो जिला मत्स्य पदाधिकारी राष्ट्रीय मत्स्यकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के क्षेत्रीय बीमा विशेषज्ञों से सीधे संपर्क कर त्वरित समाधान कराएंगे। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस बीमा सुरक्षा से किसानों में जोखिम का भय समाप्त होगा, जिससे जिले में आधुनिक मत्स्य पालन, बैंक ऋण और निजी निवेश को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

"प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि-सह-योजना के तहत पारंपरिक तालाबों के साथ-साथ बायोफ्लॉक और आरएएस जैसी आधुनिक तकनीकों से संचालित सभी मत्स्य पालन इकाइयों को बीमा का सुरक्षा कवच दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं और बीमारियों से होने वाले नुकसान से किसानों की पूंजी को बचाना और जिले में आधुनिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देना है।"

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कृष्ण कन्हैया, जिला मत्स्य पदाधिकारी, बांका