बांका में 1000 शिक्षकों को मिला पसंदीदा स्कूल! सरप्लस और म्यूचुअल ट्रांसफर का आवंटन पूरा; 14 सितंबर तक अंतिम पत्र
बांका में शिक्षक स्थानांतरण के दूसरे चरण में लगभग एक हजार सरप्लस और पारस्परिक शिक्षकों को उनके पसंदीदा विद्यालय आवंटित ...और पढ़ें

Banka Teacher Transfer: बांका में 1000 सरप्लस शिक्षकों को आवंटित हुए पसंदीदा स्कूल, 14 सितंबर तक मिलेंगे अंतिम पत्र
HighLights
बांका में 1000 शिक्षकों को पसंदीदा स्कूल आवंटित।
सरप्लस और पारस्परिक स्थानांतरण का दूसरा चरण पूरा।
मेरिट के आधार पर पारदर्शी तरीके से हुआ आवंटन।
जागरण संवाददाता, बांका। Banka Teacher Transfer: बिहार शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे शिक्षक स्थानांतरण के दूसरे चरण के तहत बांका जिले में सरप्लस शिक्षकों के विद्यालय आवंटन की औपबंधिक प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इसके तहत प्राथमिक से लेकर 12वीं (उच्च माध्यमिक) तक के करीब एक हजार शिक्षकों को उनके पसंदीदा विद्यालय आवंटित कर दिए गए हैं। पारदर्शी व्यवस्था के चलते अधिकांश शिक्षकों को उनकी पहली पसंद (फर्स्ट च्वाइस) का स्कूल ही मिला है।
बांका जिले में शिक्षक स्थानांतरण के दूसरे चरण की औपबंधिक विद्यालय आवंटन प्रक्रिया पूरी
प्राथमिक से 12वीं तक के लगभग एक हजार सरप्लस व पारस्परिक (म्यूचुअल) शिक्षकों को आवंटित हुए स्कूल
स्थानांतरण अंकों (मेरिट) के आधार पर मिला विद्यालय, अधिकांश शिक्षकों को मिला उनका पहला विकल्प
10 से 14 सितंबर के बीच ई-शिक्षाकोष पोर्टल से डाउनलोड होंगे अंतिम स्थानांतरण पत्र
ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं आपत्ति
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सरप्लस शिक्षकों के साथ-साथ पारस्परिक (म्यूचुअल) स्थानांतरण के लिए आवेदन करने वाले शिक्षकों को भी विद्यालय आवंटित किए गए हैं। पूरा आवंटन पूरी तरह पारदर्शी तरीके से 'स्थानांतरण अंक' (वेटेज स्कोर) के आधार पर किया गया है। जिन शिक्षकों का स्थानांतरण अंक अधिक था, उन्हें वरीयता के आधार पर पहले स्कूल आवंटित हुआ।
यदि किसी शिक्षक को इस औपबंधिक सूची पर कोई आपत्ति है, तो वे विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 10 से 14 सितंबर के बीच सभी संबंधित शिक्षकों को ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से अंतिम स्थानांतरण पत्र निर्गत कर दिए जाएंगे।
15 राज्यों के 70 स्टॉल, हर वर्ग के लिए खास उत्पाद
बांका शहर के आरएमके मैदान में चार सितंबर से शुरू हुआ शिल्प उत्सव मेला शहरवासियों और ग्रामीणों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। 23 सितंबर तक चलने वाला यह मेला प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। शाम ढलते ही परिसर में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
मेले में देश के 15 विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के 70 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। यहां महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के उपयोग के सामान सहित घर की सजावट की वस्तुएं उपलब्ध हैं। महिलाओं के लिए साड़ी, सूट, फैंसी ज्वेलरी, जयपुरी जूती, लहंगा व कॉस्मेटिक, जबकि पुरुषों के लिए बंडी, शर्ट, कुर्ता, गमछा और चादर के स्टॉल सजे हैं। बच्चों के खिलौने और लजीज खान-पान के काउंटर भी मेले का बड़ा आकर्षण बने हुए हैं।
सहारनपुर के फर्नीचर से लेकर खुर्जा की क्रॉकरी तक उपलब्ध
मेले में सहारनपुर का नक्काशीदार फर्नीचर, लखनऊ का चिकन वर्क, भागलपुर का मशहूर सिल्क, बंगाल के जूट बैग, जयपुर की पारंपरिक जूतियां व लहंगे, फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियां, राजकोट की ज्वेलरी, खुर्जा की क्रॉकरी तथा हरियाणा की बेडशीट व पर्दे खूब पसंद किए जा रहे हैं। मेला प्रबंधक सुधीर शर्मा ने बताया कि अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक शिल्पकला से सजे उत्पाद लोगों को खूब लुभा रहे हैं और बेहतरीन बिक्री से स्टॉल धारक भी काफी उत्साहित हैं।
