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15 लाख टन चीनी कोटा फिर भी किल्लत! बांका में ₹6000 क्विंटल तक पहुंचे दाम, दुर्गा पूजा पर महंगी हुई मिठास

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:15 AM (GMT+05:30)

Sugar Price Hike : त्योहारी सीजन में बांका में चीनी की कीमतें ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जिससे ...और पढ़ें

Sugar Price Hike : बांका के बाजारों में त्योहारी मांग के बीच चीनी के भाव में उछाल

Sugar Price Hike : बांका के बाजारों में त्योहारी मांग के बीच चीनी के भाव में उछाल

HighLights

  1. बांका में चीनी की कीमतें ₹60 प्रति किलो तक पहुंचीं।

  2. त्योहारी सीजन में कृत्रिम किल्लत और मुनाफाखोरी का आरोप।

  3. जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग।

संवाद सूत्र, बांका।  Sugar Price Hike : त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही बाजार में मिठाइयों और पकवानों की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही मुनाफाखोरों ने आम जनता की 'मिठास पर कब्जा' कर लिया है। बांका के बाजारों में चीनी की बढ़ती कीमतों और लगातार घटती आपूर्ति को लेकर व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं में भारी रोष है। सरकार द्वारा 15 लाख टन चीनी का मासिक कोटा निर्धारित किए जाने के बावजूद बाजार में चीनी का जबर्दस्त टोटा बना हुआ है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि जिले में 48 से 50 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब उछलकर 55 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

मिलों पर कृत्रिम किल्लत का आरोप, आपूर्ति रोकने का खेल

स्थानीय व्यापारियों और जिला खाद्यान्न संघ ने आरोप लगाया है कि बिहार समेत अन्य क्षेत्रों की कुछ प्रमुख चीनी मिलों ने जानबूझकर कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी है। मिल स्तर पर चीनी की आधिकारिक कीमत 4,500 से 4,600 रुपये प्रति क्विंटल दर्शाई जा रही है, लेकिन आपूर्ति के लिए व्यापारियों से इसके अतिरिक्त राशि की मांग की जा रही है।

व्यापारियों का कहना है कि जब कोई दुकानदार इस मनमानी का विरोध करता है, तो मिल प्रबंधन उसकी आपूर्ति ही रोक देता है। आपूर्ति बाधित होने के कारण खुले बाजार में चीनी के थोक भाव 5,500 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं, जिससे खुदरा बाजार में कीमतें आसमान छू रही हैं।

12 हजार क्विंटल की मासिक खपत, बिचौलियों की चांदी

बांका जिले में सामान्य दिनों में हर महीने लगभग 12 हजार क्विंटल चीनी की खपत होती है, जबकि दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ जैसे महापर्वों में यह मांग काफी बढ़ जाती है। जिले के छोटे-बड़े करीब 10 थोक विक्रेताओं और 58 थोक दुकानदारों के नेटवर्क के जरिए गांव-कस्बों की छोटी दुकानों तक चीनी पहुंचती है।

आपूर्ति चक्र बाधित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में किल्लत और अधिक गंभीर हो गई है। जिला खाद्यान्न संघ के अनुसार, मिलों के अधिकृत एजेंट और बिचौलिए संकट का लाभ उठाकर प्रति क्विंटल करीब 1,000 रुपये तक का अतिरिक्त और अवैध मुनाफा कमा रहे हैं।

आम बजट पर पड़ा सीधा असर, जांच की मांग

कीमतों में अप्रत्याशित उछाल से मध्यम और गरीब तबके के घरेलू बजट पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। मिठाइयों के कारोबार से जुड़े हलवाइयों और छोटे दुकानदारों की लागत भी बढ़ गई है। जिला खाद्यान्न संघ के जिलाध्यक्ष संजय तिवारी ने इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, "जब पूर्व में चीनी की दर 4,500 से 4,600 रुपये प्रति क्विंटल थी, तब अचानक ऐसा कौन सा संकट आ गया कि बाजार में कीमत बढ़कर 6,000 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई?" उन्होंने इसे सीधे तौर पर संगठित जमाखोरी और मुनाफाखोरी करार दिया।

संघ ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि इस पूरे सिंडिकेट और आपूर्ति श्रृंखला की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, जमाखोरों पर कड़ी कार्रवाई हो और त्योहारों को देखते हुए चीनी की आपूर्ति तुरंत सामान्य कराई जाए।