बांका। टीबी फ्री इंडिया कैंपेन के तहत 23 सितंबर तक स्वास्थ्य विभाग चिन्हित गांव में एक सघन अभियान चलाकर यक्ष्मा रोगियों की तलाश करेगा। जिसको लेकर आशा एएनएम एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी तैयार डाटाबेस के आधार पर काम शुरू कर दिया है।

इसी को लेकर रविवार को जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी सह यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल के नेतृत्व में जिला स्तरीय टीम जयपुर क्षेत्र के विभिन्न गांव में दौरा कर टीवी मरीजों की खोज की। जिसमें मुख्य रूप से एसीएमओ डॉ. प्रवेज अफजल, यक्ष्मा चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार, डीपीसी गणेश झा, यक्ष्मा पर्यवेक्षक सुनील कुमार एवं डाटा ऑपरेटर अनुज कुमार शामिल थे। स्वास्थ्य केंद्र सर्वप्रथम रसोइया आदिवासी गांव पहुंचे। जहां पर आशा एवं आशा फैसिलिटेटर ने कई मरीजों की जांच की। इस दौरान एक लेप्रोसी मरीज की पहचान की गई। चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि 14 दिनों तक लगातार चिन्हित गांव में आशा, एएनएम एवं स्वास्थ्य कर्मी के माध्यम से संभावित रोगियों की जांच एक्स-रे एवं सिविनेट से विशेष जांच कर टीबी से ग्रसित रोगियों को चिन्हित किया जा रहा है। जांच में निकले सभी टीबी रोगियों को खानपान के लिए प्रत्येक महीने पांच सौ रुपये खाते में भेजा जाएगा। खासकर स्वच्छता जागरुकता एवं खानपान रहन-सहन के प्रभाव से आदिवासी गांव में लोग यक्ष्मा बीमारी के शिकार हो जाते हैं। वैसे दो सप्ताह या उससे अधिक समय से हो रही खांसी टीबी के लक्षण हो सकते हैं। अक्सर बुखार रहना, वजन में लगातार गिरावट, भूख न लगना, रात में पसीना आना यह शुरुआती दौर के प्रमुख लक्षण है। टीबी मरीज खोज अभियान रविवार को जयपुर क्षेत्र के रसोईया, भलुआ नारायणपुर एवं जयपुर में चलाया गया। अधिकारी ने बताया कि अब तक पूरे जिले में 140 संभावित मरीजों की जांच की गई। जिसमें 14 टीबी मरीज मिले हैं।

Posted By: Jagran

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